Saturday, September 8, 2018

‘Shyam Rang Rangaa Re !’: Sanskrit Version (Lyrics: श्याम-रङ्गान्वितं रे !) Dr. Harekrishna Meher

Original Hindi Film Song : ‘Shyaam Rang Rangaa Re ! Har Pal Mera Re !’ *
श्याम रंग रंगा रे !, हर पल मेरा रे !  (Film ‘Apane Paraaye’ 1980) 
*
Sanskrit Translation by : Dr. Harekrishna Meher
(As per Original Hindi Tune)
Sanskrit Version Lyrics : श्याम-रङ्गान्वितं  रे !  मम  प्रतिक्षणं  रे ! *   
‘Shyaama-Rangaanvitam Re ! Mama Pratikshanam Re !’ 
* Sanskrit Singer : Kuldeep Joshi (New Delhi) 
*
Winner in Sanskrit Lyric Translation Competition
Conducted by Sanskrit Vaartaavali, DD News Channel, Delhi.
Program Telecast on 8-September-2018, Saturday at 7 pm.
Recast on 9 September 2018 at 12.30 pm. 
* Courtesy : DD NEWS Channel, Vaartavali. 
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 Complete Sanskrit Song: DD News Sanskrit : FaceBook Link :
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Vaartavali: Full Episode (8 September 2018): YouTube Link :
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YouTube Link : HKMeher Channel :
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Direct Video on FaceBook of Harekrishna Meher : Link :
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हिन्दी-गीत : श्याम रंग रंगा रे * 
चलचित्र : अपने पराये (१९८०) *
मूलस्वरानुकूल-संस्कृतानुवादकः - डॉ. हरेकृष्ण-मेहेरः 
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कृष्ण.. !  कृष्ण.. !  अये कृष्ण.. !
श्याम-रङ्गान्वितं  रे !  मम  प्रतिक्षणं  रे ! 
श्याम-रङ्गान्वितं  रे !  मम  प्रतिक्षणं  रे ! 
मानसं मदीयं मत्तम्, तव मधुवनं रे ! 
श्याम-रङ्गान्वितं  रे !  मम  प्रतिक्षणं  रे ! ॥ (०)
*
यस्य रङ्गेण सा  रञ्जिता मीरा, रञ्जिता राधा रे !  
रज्जुस्तन्मनो-मोहनेन वै, मयाऽपि बद्धा रे ! 
यस्य रङ्गेण सा  रञ्जिता मीरा, रञ्जिता राधा रे !  
रज्जुस्तन्मनो-मोहनेन वै, मयाऽपि बद्धा रे ! ॥ हो..  
श्याम-रङ्गान्वितं  रे !  मम  प्रतिक्षणं  रे !  ॥ (१)
*
इमानि फुल्लानि  त्वत्-कृते मे, श्वास-पुष्पाणि,  
जीवनमेतत्  पूजा-स्थाली,  दीपाः लोचने । 
इमानि फुल्लानि  त्वत्-कृते मे, श्वास-पुष्पाणि, 
जीवनमेतत्  पूजा-स्थाली,  दीपाः लोचने ॥  हो..  
श्याम-रङ्गान्वितं  रे !  मम  प्रतिक्षणं  रे ! 
मानसं मदीयं मत्तम्, तव मधुवनं रे !
श्याम-रङ्गान्वितं  रे !  मम  प्रतिक्षणं  रे ! ॥ (२)
*
सुखं नायाति वै, सुखं नायाति वै ।  
दर्शनं  ते   विना कृष्ण !  
याति न दिनं  याति निशा, नायाति वै ।  
सुखं नायाति वै ।  
कथं मे छलितम् ।  *कथं मे छलितम् । 
हाँ. हाँ.  दर्शनं  ते   विना कृष्ण !
याति न दिनं  याति निशा, नायाति वै ।  
सुखं नायाति वै ।  
कृष्ण ! .. कृष्ण ! ...॥ (३) 
*
शृणोतु यमुना-कूलं, अपि जलघट्ट-कुलम्,     
आयाहि  कृष्ण हे कृष्ण !
शृणोतु यमुना-कूलं, अपि जलघट्ट-कुलम्,    
आयाहि  कृष्ण हे कृष्ण ! 
रास-रचयितः   गो-चारयितः !
आयाहि बलराम-भ्रातः !  
चपलो भवसि कदा.. चपलो भवसि कदा, 
तनु-घटहारी कदा, त्वं रक्षको भक्तानाम् ।  
भव-वारिधितो   नटनागर हे ! 
कारय मम नौ-पारम् ॥ 
शृणोतु यमुना-कूलं, अपि जलघट्ट-कुलम्,    
आयाहि  कृष्ण  हे कृष्ण ! 
कृष्ण !.. कृष्ण !...अये कृष्ण !
श्याम-रङ्गान्वितं  रे !  मम  प्रतिक्षणं  रे ! 
श्याम-रङ्गान्वितं  रे !  मम  प्रतिक्षणं  रे ! ॥ (४)   
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Direct Video on FaceBook of Harekrishna Meher : Link :
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Original Hindi Song : ‘Shyam Rang Ranga Re’
Film : Apane Paraye (1980)
Lyrics : Yogesh Music : Bappi Lahiri । Singer : Yesudas
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मूल-हिन्दीगीत : श्याम रंग रंगा रे *
चलचित्र : अपने पराये (१९८०) *
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कान्हा. !  कान्हा.. ! ओ रे कान्हा.. !
श्याम रंग रंगा रे !  हर पल मेरा रे ! 
श्याम रंग रंगा रे !  हर पल मेरा रे ! 
मेरा मतवाला है मन, मधुवन तेरा रे !
श्याम रंग रंगा रे !  हर पल मेरा रे ! ॥ (०)
*
जिसके रंग में  रंगी वो मीरा, रंगी थी राधा रे !  
मैंने भी उस  मनमोहन से, बन्धन बान्धा रे ।
जिसके रंग में  रंगी वो मीरा, रंगी थी राधा रे !  
मैंने भी उस  मनमोहन से, बन्धन बान्धा रे ॥ हो..  
श्याम रंग रंगा रे !  हर पल मेरा रे ! ॥ (१)
*
मेरी साँसों के ये  फूल खिले हैं, तेरे ही लिये,
जीवन है पूजा की थाली, नैना हैं  दीये 
मेरी साँसों के ये  फूल खिले हैं, तेरे ही लिये,
जीवन है पूजा की थाली, नैना हैं  दीये ॥ हो..    
श्याम रंग रंगा रे !  हर पल मेरा रे ! 
मेरा मतवाला है मन, मधुवन तेरा रे !   
श्याम रंग रंगा रे !  हर पल मेरा रे ! ॥ (२)
*
नहीं चैन पड़े.., नहीं चैन पड़े ।
देखे बिना  तोहे कान्हा
दिन बीते ना रैन ढले,  चैन पड़े । 
नहीं चैन पड़े ।
मोहे काहे छले ।  मोहे काहे छले ।
हाँ. हाँ.  देखे बिना  तोहे कान्हा
दिन बीते ना रैन ढले, चैन पड़े । 
नहीं चैन पड़े ।  कान्हा... कान्हा... ॥ (३)
*
सुने जमुना के तट,  सुने सारे पनघट 
आजा रे ओ कृष्ण कन्हैया !
सुने जमुना के तट,  सुने सारे पनघट 
आजा रे ओ कृष्ण कन्हैया !
रास रचैया   धेनु चरैया
आजा बलराम के भैया !  
कभी बने नटखट.., कभी बने नटखट, 
हरे कभी तन-घट, भक्तन के रखवैया । 
भव-सागर से    नटनागर ! ये
पार लगा दे मेरी नैया ॥ 
सुने जमुना के तट,  सुने सारे पनघट 
आजा रे ओ कृष्ण कन्हैया !  
कन्हैया... कन्हैया... ओ रे कन्हैया 
श्याम रंग रंगा रे !  हर पल मेरा रे ।
श्याम रंग रंगा रे !  हर पल मेरा रे ! ॥ (४) 
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Related Links :
‘Chalachitra-Gita-Sanskritaayanam’: चलचित्र-गीत-संस्कृतायनम्  :
* * *
Biodata: Dr. Harekrishna Meher :
* * * 
YouTube Videos (Search): Dr. Harekrishna Meher :
* * * 
VIDEOS of Dr.Harekrishna  Meher : 
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Dr. Harekrishna Meher on Radio and Doordarshan Channels:
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Friday, September 7, 2018

आशा : Aasha (Sanskrit Sonnet) : Dr. Harekrishna Meher

Aasha (Sanskrit Sonnet)
By: Dr. Harekrishna Meher
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आशा 
(वसन्ततिलक-नाम्ना चतुर्दशाक्षर-वृत्तेन रचिता
चतुर्दश-पङ्क्तिका कविता,  आङ्ग्ल-सॉनेट्-स्वरूपा)
* डॉ. हरेकृष्ण-मेहेरः
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आशां विना सफलो  भुवि जीवनार्थः 
मान्यास्ति  शून्य-हृदये  स्फुरित-प्रकाशा   
यां प्राप्य तुष्यति जनः  सततं कृतार्थः
सा जीवनी मधुनिधान-सुधा-निकाशा   

आशा हि तोयममृतं  मरुभूमि-मध्या  
सा भाति भाग्यवशतः सुफलं दधाना
सन्ध्याऽपि सा मधुमयी कदापि वन्ध्या 
धत्ते स्वरूपमनिशं  जगतीह नाना

काम्यं वै दुरधिरोहणमत्र धीरैः
पूर्णा न सा यदि तदा  धृत-दुःख-दंशा
सत्कार्य-साधन-विधौ  प्रिय-कर्म-वीरैः
सोपानमस्ति महसां  चिरमुज्ज्वलं सा

तृष्णा-तरङ्ग-भरिता  भव-मोहजाले    
पुष्णाति किं शुभफलं  विषमे विशाले
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(From * Pushpanjali-Vichitra * Kavya of Harekrishna Meher) 
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Related Links :  
‘पुष्पाञ्जलि-विचित्रा’ (संस्कृत-गीतिकाव्यम्) 
http://hkmeher.blogspot.com/2016/01/pushpanjali-vichitra-sanskrit-kavya.html
* * * 
Contributions to Sanskrit Literature : 
http://hkmeher.blogspot.com/2013/04/drharekrishna-mehers-contributions-to.html
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Monday, September 3, 2018

‘GANGADHAR MEHER SAMMAN’ Awarded to Dr. Harekrishna Meher (By GM Pratishthan, Bhubaneswar)

Dr. Harekrishna Meher was honoured with
‘GANGADHAR MEHER SAMMAN’- 2018
on the occasion of 157th Birthday Celebration
of Poet Gangadhar Meher (1862-1924) on Shravana Purnima, 26 August 2018,
organized by Gangadhar Meher Pratishthan, Bhubaneswar, Odisha.
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Dignitaries present in the Function were:
Chairperson: Sj. Narendra Kumar Mishra (Ex-VC, Utkal University of Culture, Odisha),
Chief Guest Padma-Bhushan Renowned Poet Sj. Ramakant Rath,
Guest of Honour Sj. Bijay Kumar Nayak (Director, Department of Culture, Govt. of Odisha),
Chief Speaker Prof. Sarat Rath (Retired Prof. of Odia, Utkal University),
Speaker of Honour Dr. Harekrishna Meher (Retired Sanskrit Reader and Head, 
PG Department of Sanskrit, Gangadhar Meher Autonomous College, Sambalpur),
Sj. Mihir Kumar Meher (President, Gangadhar Meher Pratishthan, Bhubaneswar)
and Sj. Dillip Dash Sharma (Organising Secretary, Meher Jayanti Committee, Bhubaneswar).
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Chief Guest Poet Sj. Ramakanta Rath honoured Dr. Meher with Manapatra, 
angavastra, memento and bouquet for his remarkable contributions to Indian Literature.
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 Dr. Meher is a researcher of Gangadhar Literature and has rendered Tri-Lingual 
 Hindi-English-Sanskrit Translations of Poets Tapasvini Mahakavya. 
All the published three translations of Tapasvini are available on the internet 
and are widely spread on the globe.
Books Link :
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Dr. Harekrishna Meher, as Speaker of Honour, delivered speech on Significance
of Literary Writings of Swabhava-Kavi Gangadhar Meher in the Present Society.
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Published in E-Journal Muse India:  
Gangadhar Meher Samman News:
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Related Links : 
FaceBook :
* * *
Biodata (English) : 
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