Wednesday, November 25, 2009

Manohar Meher : Bāimana Koili (बाइमन कोइलि)


Bāimana Koili (Oriya Song)
By : Poet Manohar Meher (1885- 1969)

( Extracted from the Book 'Manohar Koili Mālikā' )

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'Koili' has a special significance in the category of spiritual songs of Oriya Literature. In this Bāimana Koili, mind is admonished to be free from the transient mundane chains and to devotedly meditate upon the Almighty Supreme Being for eternal achievement and salvation. Here 34 couplets are composed by the poet in accordance with 34 letters of Oriya Alphabet (Consonants : 'Ka' to 'Ksha' ) in Chautisha Style.

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बाइमन कोइलि (ओड़िआ गीत)
रचयिता : कवि मनोहर मेहेर
('मनोहर कोइलि माळिका'रु उद्धृत)
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कोइलि, कह मन काहिँकि मुराट ।
केते दिन थिब आण्ट छुटिब तो घट । लो कोइलि ॥ (१)

कोइलि, खळ जने सङ्ग होइ निति ।
खराप बुद्धिरे तुहि रहिथाउ माति । लो कोइलि ॥ (२)

कोइलि, गरबे य़ा करुछु गुमान ।
गरब-गञ्जन तोर आदित्य-नन्दन । लो कोइलि ॥ (३)

कोइलि, घट छुटि य़िब य़ेतेबेळे ।
घरणी कान्दिब मुण्ड कोड़ि सेहिकाळे । लो कोइलि ॥ (४)

कोइलि, उद्धार होइबु य़ेबे तुहि ।
उत्तम जनङ्क सङ्गे सङ्ग हुअ य़ाइ । लो कोइलि ॥ (५)

कोइलि, चतुर्दश भुबन ठाकुर ।
चिन्तामणि नाथ हरि क्रिबे उद्धार । लो कोइलि ॥ (६)

कोइलि, छा्ड़ हिंसा अहंकार सबु ।
छन्द कपट न रखि भज महाप्रभु । लो कोइलि ॥ (७)

कोइलि, जगत जनङ्क पिता हरि ।
जगते उड़ुछि बाना महिमा ताङ्करि । लो कोइलि ॥ (८)

कोइलि, झस य़ेह्ने नीर मध्ये खेळे ।
झाम्प देब बक पक्षी जगिअछि कूळे । लो कोइलि ॥ (९)

कोइलि, निर्मळ भाबरे भज हरि ।
निश्‍चय रखिबे तोते शङ्ख-चक्र-धारी । लो कोइलि ॥ (१०)

कोइलि, टाण-पण न सहन्ति हरि ।
टेकिछन्ति आश्रितकु बिपदुँ उद्धरि । लो कोइलि ॥ (११)

कोइलि, ठुळ-शून्यबासी भगबान ।
ठिके ठाब मागुअछि मनोहर दीन । लो कोइलि ॥ (१२)

कोइलि, डेरिछन्ति श्रुति भाबग्राही ।
डाकिले शुणन्ति डाक भक्त भाबे थाइ । लो कोइलि ॥ (१३)

कोइलि, ढळ ढळ पङ्कज-नयन ।
ढाळुछन्ति कृपा-जळ भकत-जीबन । लो कोइलि ॥ (१४)

कोइलि, अणाकार अखिळ-बिहारी ।
अशेष भुबने सेहु एका अधिकारी । लो कोइलि ॥ (१५)

कोइलि, तपन बंशरे होइ जात ।
त्रिजीबी बिश्रबा-सुत करिले निपात । लो कोइलि ॥ (१६)

कोइलि, स्थाबर जङ्गम कीट य़ेते ।
स्थूळ सूक्ष्म-रूपी बिराजित सर्ब-भूते । लो कोइलि ॥ (१७)

कोइलि, दयामय ताङ्क दया सदा ।
देले कोटि बस्त्र द्रौपदीङ्क खण्डि बाधा । लो कोइलि ॥ (१८)

कोइलि, धर्म चारि य़ुगे अछि सत ।
धर्म कला लोकङ्कर बढ़‍इ महत । लो कोइलि ॥ (१९)

कोइलि, नरसिंह रूप हेले हरि ।
न सहि भकत-दुःख हिरण्यकु चिरि । लो कोइलि ॥ (२०)

कोइलि, पुत्र-नाम धरि अजामिळ ।
पाप ताप नाशि अन्ते गला बिष्णु-आळ । लो कोइलि ॥ (२१)

कोइलि, फुटिछि भकत-मठे फुल ।
फुल-बास आशे भक्ते होइछन्ति ठुळ । लो कोइलि ॥ (२२)

कोइलि, बामन रूपरे आदिकन्द ।
बळि-द्वारे दान मागि हरिले सम्पद । लो कोइलि ॥ (२३)

कोइलि, भब-जळे हरि-नाम भेळा ।
भणे मनोहर त्राहि कर चकाडोळा । लो कोइलि ॥ (२४)

कोइलि, मानब-जनम अटे सार ।
महासुख-भोग ए त दुर्लभ संसार । लो कोइलि ॥ (२५)

कोइलि, य़मुनार भ्राता काळराजा ।
य़म जाणि पाप पुण्य करे न्याय बुझा । लो कोइलि ॥ (२६)

कोइलि, राम नाम दुइटि अक्षर ।
रत्नाकर पापी भजि होइले निस्तार । लो कोइलि ॥ (२७)

कोइलि, लाबण्य-मूरति लक्ष्मीपति ।
लोभ हिंसा अहंगुण नाहिँ ताङ्क कति । लो कोइलि ॥ (२८)

कोइलि, बाञ्छा-फळ-दाता भगबान ।
बाना उड़े फरफर पतित-पाबन । लो कोइलि ॥ (२९)

कोइलि, शरण पशिले ताङ्क पादे ।
शुभे ताकु इह अन्ते रखन्ति गोबिन्दे । लो कोइलि ॥ (३०)

कोइलि, षड़ अरि काम क्रोध य़ेते ।
षड़ चक्रे बसि दुःख दिए नाना मते । लो कोइलि ॥ (३१)

कोइलि, संसार-सागर माया-जाल ।
सरिला हाट पसरा पराय बेभार । लो कोइलि ॥ (३२)

कोइलि, हरेकृष्ण महामन्त्र सार ।
हरषरे भज निति भबुँ हेबु पार । लो कोइलि ॥ (३३)

कोइलि, क्षमानिधि खण्डिबे दुर्गति ।
क्षमे जणाउछि मनोहर मन्द-मति । लो कोइलि ॥ (३४)

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( 'बाइमन कोइलि' : कवि मनोहर मेहेर,
मूल पुस्तक 'मनोहर कोइलि माळिका',
प्रकाशक : अरुणोदय प्रेस्, कटक, ऒड़िशा.
प्रथम संस्करण : १९४८.)

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Source Book :
'Manohar Koili Mālikā' of Poet Manohar Meher
Publisher : Arunodaya Press, Cuttack, Orissa,
First Edition : 1948
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Also Included in the Book
Manohar Padyāvali of Poet Manohar Meher,
Edited by Dr. Harekrishna Meher
and Published by Sri Narayan Bharasa Meher,
Manohar Kavitā Vās, Sināpāli, Kalahandi, Orissa, in 1985
on the occasion of 100th Year Celebration of Poet's Birth
in his native place Sināpāli.

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