Sunday, May 25, 2014

Sanskrit Kavya 'Hasitasya Vayasya' (Haiku-Sijo-Tanka Anthology):Dr.HKMeher

डॉहरेकृष्ण-मेहेर-प्रणीत संस्कृत काव्य 
हासितास्या वयस्या
(हाइकु-सिजो-तान्का कविताओं की सङ्कलना)
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‘Hāsitāsyā Vayasyā’ :
Sanskrit Kāvya By : Dr.Harekrishna Meher 
(Anthology of Haiku-Sijo-Tanka Poems)
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हासितास्या वयस्या : काव्य का यह अभिनव नामकरण अत्यन्त रोचक भाव से किया गया है 
और यह कवि-प्रतिभा का एक सुपरिचायक तत्त्व है
हाइकु शब्द का  प्रथम वर्ण हा,
सिजो शब्द का  प्रथम वर्ण सि
एवं तान्काशब्द का  प्रथम वर्ण ता’.  

इन तीनों को मिलाकर हासिता शब्द बनाया है कवि ने
यह हासिता शब्द संक्षेप में इन तीनों छन्दों का सूचक है  
वयस्या शब्द का अर्थ हैसखीयासहेली इसका तात्पर्य है कविता-रूपिणी सखी   
संस्कृत में आस्य शब्द का अर्थ है मुख
हासितास्या शब्द के दो अर्थ किये जा सकते हैं श्लेष-माध्यम से
 () प्रथम मुख्य अर्थ इसप्रकार है :
हासिता’ (हासिता:) आस्ये यस्याः सा, हासितास्या
जिसके मुख में हासिता है, अर्थात् हाइकु, सिजो और तान्का छन्दों का उच्चारण है
ऐसीवयस्यासखी कविता
इसप्रकार बहुब्रीहि समास में यह अर्थ व्यञ्जित होता है
() अन्य अर्थ है इसप्रकार :
हासितम् (अर्थात् हास-युक्तम्) आस्यं (मुखं) यस्याः सा, हासितास्या  
जिसका मुख हास से अर्थात् मुस्कान से युक्त है, ऐसीवयस्या’, सखी कविता  
 कविता-सखी का मुख मुस्कानभरा है और उस मुख में हाइकु-सिजो-तान्का छन्दों का 
परिप्रकाश भी है  इन दो प्रकार  अर्थों को व्यक्त करता है कवि-प्रणीत इस काव्य का 
अभिनव नामकरण हासितास्या वयस्या   
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आधुनिक संस्कृत साहित्य में अनेक पारम्परिक एवं नव्य संस्कृत छन्दों के साथ 
कुछ विदेशी साहित्य के काव्य-छन्दों का प्रयोग भी प्रचलित हुआ है  
इनमें जापानी छन्द हैं हाइकु, तान्का एवं कोरिया-देशीय छन्द है सिजो । 
ये काव्य-साहित्य के लघु और सार-गर्भक छन्द हैं इसलिये भारतीय साहित्य में भी 
इन छन्दों का प्रयोग होने लगा है   

सामान्यतः इन छन्दों के स्वरूप इसप्रकार हैं ।    
हाइकुछन्द में तीन अंश होते हैं : (-- वर्ण)  
सिजो’ छन्द में छह अंश होते हैं (----- वर्ण) 
तान्का’ छन्द में पाँच अंश होते हैं (----७ वर्ण) 
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Some Extracts are presented here. 

कुछ पङ्क्तियाँ  :
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