Friday, July 24, 2026

Meri Jaani (मेरी जानी): Original Hindi Lyrics by Dr.Harekrishna Meher*

'Meri Jaani’  (मेरी जानी) *

Original Hindi Lyrics By : Dr. Harekrishna Meher
*
(This Hindi Song can be presented in the tune of the famous 
Sambalpuri Song ‘Rangabati’)
*

Further, this Hindi Song has been composed in a different original
new tuning by the author.
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‘मेरी जानी’
मौलिक हिन्दी गीत रचना : डॉ. हरेकृष्ण मेहेर * 
(यह प्रसिद्ध सम्बलपुरी ‘रंगबती’ गीत के स्वर में परिवेषण-योग्य है ।
यह हिन्दी गीत किसी गीत का अनुवाद नहीं है ।) 
गीतकार डॉ. मेहेर द्वारा भिन्न-रूप में इस हिन्दीगीत की मौलिक स्वर-रचना भी की गयी है ।  
  
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मौलिक हिन्दी गीत : ‘मेरी जानी’
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(Male)
ओ मेरी जानी !  ओ मेरी जानी !      
ओ मेरी जानी !  ओ मेरी जानी  !      
हे, सजनी रे  कजरारे  नैनों की रानी  ! 
ऋतु आई  कैसी मस्तानी ।
हाय, सजनी रे  कजरारे नैनों की रानी ! 
ऋतु आई  कैसी मस्तानी ।
(Female)
ओहो मेरे साजन ! ओ मेरे साजन !  
ओ मेरे साजन ! ओ मेरे साजन ! 
हाय, तेरे लिये  बन गयी मैं  दी-वा-नी,
कुदरत की ये मेहरबानी ।
हे, तेरे लिये बन गयी मैं  दी-वा-नी,
कुदरत की ये मेहरबानी ।
(Duet)
यादों में, तेरी यादों में,
यादों में, तेरी यादों में,
कभी खुशी छाई कभी  गम की निशानी ।
(M)
मेरी जानी !  मेरी जानी ॥ (०)
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(F)
खुशबू ये फूलों की सारी बधाई,
साथ ले आई, प्रीत जगाई, मन में समाई, हे । 
खुशबू ये फूलों की सारी बधाई,  
साथ ले आई, प्रीत जगाई, मन में समाई, हे । 
(M)
हँसी प्यारी प्यारी लाई  रे,
हँसी प्यारी प्यारी लाई,
हँसी प्यारी प्यारी लाई, 
कली मुस्काई, ले अंगड़ाई, संग तेरे शरमाई  ।
हाय, कली मुस्काई, ले अंगड़ाई, संग तेरे शरमाई  ।
(D)
दिल में बहारों के सपने सजाकर, 
दिल में बहारों के सपने सजाकर, 
बागों में छाई  रंगीन जवानी । 
(M)
मेरी जानी !  मेरी जानी ! ॥ (१)
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(F)
जैसे चन्दा हँसे  नीले गगन में,

इसी लगन में, तू मेरे मन में, भाये नयन में, हे । 
जैसे चन्दा हँसे  नीले गगन में,
इसी लगन में, तू मेरे मन में, भाये नयन में, हे । 
(M)
चाहे कोई काँटे जन्मे  रे, चाहे कोई काँटे जन्मे, 
चाहे कोई काँटे जन्मे,
तेरे चमन में, प्रेम-आंगन में, बन्धे खुशी के दामन में ।
हाय, तेरे चमन में, प्रेम-आंगन में, बन्धे खुशी के दामन में । 
(D)
मीत है जीवन की नैया का माझी,
मीत है जीवन की नैया का माझी,
सारे जहाँ की ये रीत पुरानी ।   
(M)
मेरी जानी !  मेरी जानी ! ॥ (२)
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(F)
टूटे ना जग में कहीं दोस्ताना,  
कोई बेगाना, राही अनजाना, कैसा ठिकाना, रे ।      
टूटे ना जग में कहीं दोस्ताना,  
कोई बेगाना, राही अनजाना, कैसा ठिकाना, रे । 
(M)
बिना प्यार दिल वीराना  रे, बिना प्यार दिल वीराना, 
बिना प्यार दिल वीराना, 
आया परवाना, साथी ने माना, प्यार का एक तराना ।
हाय, आया परवाना, साथी ने माना, प्यार का एक तराना ।    
(D)
जिन्दगी के ऐसे प्यारे सफर में,
जिन्दगी के ऐसे प्यारे सफर में,
स्वर्ग हमारी है  धरती सुहानी ।
(M)
मेरी जानी !  मेरी जानी ! …. 
* *
(M) ओ मेरी जानी,  ओ मेरी जानी !
(F) ओ मेरे साजन , ओ मेरे साजन ! 
(M) ओ मेरी जानी, ओ मेरी जानी  !
(F) ओ मेरे साजन , ओ मेरे साजन ! 
(M) ओ मेरी जानी, ओ  मेरी जानी !
(F) ओ मेरे साजन, ओ मेरे साजन !  ॥ (३)
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(कुछ शब्दार्थ : जानी = जान-सी प्यारी, प्रियतमा । निशानी = चिह्न ।
वीराना = शून्यस्थान  । परवाना = सौन्दर्य-मुग्ध व्यक्ति । तराना = गीत ।)
(गीत रचना समय : ९ जनवरी १९८२, पौषपूर्णिमा, स्थान : बरगड़)
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विचित्र बात यह है कि कुछ दिनों पहले खोजते-खोजते एक अभिधान पुस्तक के आवरण पन्ने के भीतर एक कागज में लिखित मेरा यह गीत मिला ।
ओड़िशा सरकार के उच्च-शिक्षाविभाग से नियुक्ति पाकर मैं पञ्चायत महाविद्यालय, बरगड़, ओड़िशा में १९८१ से १९८८ जनवरी तक संस्कृत अध्यापक के रूप में कार्यरत था । १९८४ में उस महाविद्यालय के वार्षिक उत्सव में निमन्त्रित प्रसिद्ध ‘रंगवती’ गायक (संप्रति ‘पद्मश्री’ तथा ‘डी.लिट्’ उपाधि से सम्मानित)  श्रीजितेन्द्रिय हरिपालजी को सादर भेंट-स्वरूप यह गीत मैंने प्रदान किया था । सुविधानुसार गायन में उसका उपयोग करनेको अनुरोध किया था । उन्होंने मेरे हिन्दी गीत को देखकर सधन्यवाद ग्रहण किया था । प्रसिद्ध सम्बलपुरी ‘रंगवती’ गायिका कृष्णा पटेलजी भी उस समय मञ्च पर उपस्थित थीं । उत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में आसन अलङ्कृत किया था ओड़िआ साहित्य के प्रख्यात लेखक प्राध्यापक दिवंगत महापात्र नीलमणि साहु महोदय ने । उन्होंने उस समारोह में परिवेषित ‘रंगवती’ सम्बलपुरी युगल-गायन से अत्यन्त मुग्ध, उल्लसित एवं आनन्दित होकर अपने गले में लम्बित पुष्पमाल्य उतारकर श्रीहरिपाल जी के गले में पहना दिया था । गायिका कृष्णाजी को भी पुष्पगुच्छ देकर बहुत बहुत बधाई अर्पण की थी । कार्यक्रम अत्यन्त मनोहारी एवं आकर्षणीय था ।  
कुछ दिन पहले मेरे पूछ्ने पर इस घटना की पुष्टि की महाविद्यालय के मेरे पूर्व सहकर्मी सेवानिवृत्त संस्कृत प्राध्यापक बन्धु डॉ. भरतचन्द्र नाथ जी ने । 
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इस अवसर पर मूल सम्बलपुरी ‘रंगबती’ के गीतकार श्रीमित्रभानु गौन्तिआ, संगीतकार श्रीप्रभुदत्त प्रधान, गायक डॉ. श्रीजितेन्द्रिय हरिपाल एवं गायिका डॉ. कृष्णा पटेल जी के प्रति सादर आभार तथा धन्यवाद ।
इन आदरणीय महान् चार कलाकारों के प्रति मेरा यह हिन्दी गीत सादर समर्पित है ।
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संप्रति अन्तर्जाल पर संगीतप्रेमी सुधीजनों के लिये प्रस्तुत है यह हिन्दी गीत-रचना । 
Hindi Song ‘Meri Jaani’ : 

Copyright © : Dr. Harekrishna Meher
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I shall try to prepare a Homemade Video of this Hindi song in future.
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Facebook Link : 
Meri Jaani * मेरी जानी *
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