Friday, December 30, 2016

Depiction of Dawn (Beautiful Usha) in Tapasvini Kavya/ Dr.Harekrishna Meher

Beautiful Depiction of Dawn (Usha)  
in 'Tapasvini' Mahakavya of Poet Gangadhar Meher (1862-1924) 
*
(Extracted from Tri-lingual Translations of Tapasvini
By  Dr. Harekrishna Meher) 

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Original Odia Poem from Canto-4th 
composed in mellifluous Chokhi-Raga :  In Odia Script : 
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ମଙ୍ଗଳେ ଅଇଲା ଉଷା 
ବିକଚ-ରାଜୀବ-ଦୃଶା 
ଜାନକୀ-ଦର୍ଶନ-ତୃଷା 
ହୃଦୟେ ବହି, 
କର-ପଲ୍ଲବେ ନୀହାର- 
ମୁକ୍ତା ଧରି ଉପହାର 
ସତୀଙ୍କ ବାସ ବାହାର 
ପ୍ରାଙ୍ଗଣେ ରହି । 
କଳକଣ୍ଠ-କଣ୍ଠେ କହିଲା, 
'ଦରଶନ ଦିଅ ସତି ! ରାତି ପାହିଲା ।।' (୧) 
* 
ଅରୁଣ କଷାୟ ବାସ 
କୁସୁମ-କାନ୍ତି ବିକାଶ 
ପ୍ରଶାନ୍ତ ରୂପ ବିଶ୍ୱାସ 
ଦିଅନ୍ତି ମନେ, 
କେଉଁ ଯୋଗେଶ୍ୱରୀ ଆସି 
ମଧୁର ଭାଷେ ଆଶ୍ୱାସି 
ଡାକୁଛନ୍ତି  ଦୁଃଖରାଶି 
ଉପଶମନେ । 
ଦେବା ପାଇଁ ନବ ଜୀବନ, 
ସ୍ଵର୍ଗୁୂଁ କି ଓହ୍ଲାଇଛନ୍ତି ମର୍ତ୍ତ୍ୟ ଭୁବନ ।। (୨) 
* 
ସମୀର ସଙ୍ଗୀତ ଗାଏ 
ଭ୍ରମର ବୀଣା ବଜାଏ 
ସୁରଭି ନର୍ତ୍ତନେ ଥାଏ 
ଉଷା-ନିଦେଶେ, 
କୁମ୍ଭାଟୁଆ ହୋଇ ଭାଟ 
ଆରମ୍ଭିଲା ସ୍ତବ ପାଠ 
କଳିଙ୍ଗ ଅଇଲା ପାଟ 
ମାଗଧ ବେଶେ । 
ଲଳିତ ମଧୁରେ କହିଲା, 
'ଉଠ ସତୀ-ରାଜ୍ୟରାଣି ! ରାତି ପାହିଲା ।।' (୩) 
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(In Devanagari Script) 
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मङ्गळे अइला उषा   
बिकच-राजीब-दृशा
जानकी-दर्शन-तृषा 
हृदये बहि  ।    
कर-पल्लबे नीहार-     
मुक्ता धरि उपहार
सतीङ्क बास बाहार  
प्राङ्गणे रहि  ।
कळकण्ठ-कण्ठे कहिला,
‘दरशन दिअ सति ! राति पाहिला ॥’ (१)
*
अरुण कषाय बास     
कुसुम-कान्ति-बिकाश
प्रशान्त रूप बिश्वास 
दिअन्ति मने  ।  
केउँ य़ोगेश्वरी आसि    
मधुर भाषे आश्वासि
डाकुछन्ति दुःखराशि   
उपशमने  ।
देबा पाइँ नब जीबन,
स्वर्गुँ कि ओह्लाइछन्ति मर्त्त्य भुबन ॥ (२)  
*
समीर सङ्गीत गाए   
भ्रमर बीणा बजाए  
सुरभि नर्त्तने थाए   
उषा-निदेशे  ।  
कुम्भाटुआ होइ भाट   
आरम्भिला स्तब पाठ
कळिङ्ग अइला पाट-   
मागध बेशे  ।  
लळित मधुरे कहिला,
‘उठ सती-राज्य-राणि ! राति पाहिला ॥’ (३)
*
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Hindi Translation
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समंगल आई सुन्दरी 
प्रफुल्ल-नीरज-नयना उषा, 
हृदय में ले गहरी 
जानकी-दर्शन की तृषा  ।  
नीहार-मोती उपहार लाकर पल्लव-कर में, 
सती-कुटीर के बाहर 
आंगन में खड़ी होकर  
बोली कोकिल-स्वर में,   
‘
दर्शन दो, सती अरी  ! 
बीती  विभावरी ॥’ (१) 
*
अरुणिमा कषाय परिधान,  
सुमनों की चमकीली मुस्कान  
और प्रशान्त रूप मन में जगाते विश्वास : 
आकर कोई योगेश्वरी 
बोल मधुर वाणी सान्त्वनाभरी 
सारा दुःख मिटाने पास 
कर रही हैं आह्वान  ।  
मानो स्वर्ग से उतर  
पधारी हैं धरती पर  
करने नया जीवन प्रदान ॥ (२) 
*
गाने लगी बयार 
संगीत  तैयार  । 
वीणा बजाई भ्रमर ने,  
सौरभ लगा नृत्य करने  
उषा का निदेश मान  ।  
कुम्भाट भाट हो करने लगा स्तुति गान ।   
कलिंग आया पट्टमागध बन,   
बोला बिखरा ललित मधुर स्वन,    
‘
उठो  सती-राज्याधीश्वरि ! 
बीती  विभावरी ॥’ (३) 
*
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English Translation
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Auspiciously came
Usha, the blooming lotus-eyed dame,  
in her heart cherishing keenly  
thirst for a vision
of the virtuous Janaki.  
Bearing dew-pearls as presentation  
in her hands of leafage,  
standing forward
in the outer courtyard
of Sita’s cottage,  
in cuckoo’s tone spake she,  
‘O Chaste Lady !
Deign to give your sight.  
Dawned the night.’ (1)  
*
The saffron costume  
of auroral shine,  
flowers’ smiling bloom  
and tranquil mien  
make a room  
in the mind to presume :  
Some goddess of yoga reaching the place,  
by sweet words giving solace  
calls to render relief  
from pangs of grief.  
From heaven on earth as if  
has descended to bestow a new life.  (2)  
*
Musical tune Zephyr sang swinging.  
Black Bee played on lute charming.  
By Usha’s bidding, in dance  
rapt remained Fragrance.  
Kumbhatua bird as a royal bard  
began to eulogize forward.  
As the panegyrist premier
Kalinga bird appeared there   
and spake in voice gracefully sweet,
‘Wake please,
O Queen of the empire of chaste ladies !  
Dawned the night.’ (3)  
*  
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Sanskrit Translation
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मङ्गलं समागता सौम्याङ्गना
उषा व्याकोषारविन्द-लोचना
वैदेही-दर्शनाभिलाषं वहन्ती स्वहृदये ।
पल्लव-कर-द्वये
नीहार-मौक्तिक-प्रकरोपहारं दधाना
सती-निलय-बहिरङ्गणे विद्यमाना
अभाषत कोकिल-कण्ठ-स्वना सूनरी,
‘दर्शनं देहि सति ! प्रभाता विभावरी ॥’ (१)
*
अरुण-काषायाम्बरम्,
स्मितं सुमनसां विकस्वरम्,
प्रशान्त-रूपं च स्वान्ते जनयन्ति प्रत्ययम् :
काऽपि योगेश्वरी तत्रागत्य स्वयम्
सुमधुर-वचनैः सान्त्वनां प्रदाय
समाकारयति दुःखराशि-प्रशमनाय ।
नवीन-जीवन-दानार्थं सा ध्रुवम्
विद्यते त्रिदिव-भुवनादवतीर्णा भुवम् ॥ (२)
*
सङ्गीतं गायति स्म समीरणः,
भृङ्गो वीणा-वादन-प्रवणः ।
सुरभिरवर्त्तत नर्त्तन-तन्मया
उषाया अनुज्ञया  ।
वैतालिको भूत्वा कुम्भाट-विहङ्गः  
प्रारभत स्तुति-पठनम्  ।  
समागतो मागध-मुख्य-वेशः कलिङ्गः
प्रोवाच सुललित-मधुर-स्वनम्,
‘उत्तिष्ठ, सती-राज्याधीश्वरि !  
प्रभाता विभावरी ॥’ (३)
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Ref : Complete Hindi-English-Sanskrit Versions of Tapasvini Kavya :

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Related Links : 
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Tuesday, December 13, 2016

‘Ek Pyaar Ka Nagma Hai’: Sanskrit Version (Lyrics एकं प्रणय-गीतम् : Dr.Harekrishna Meher): Vaartaavali DD News

 ‘Ek Pyaar Ka Nagma Hai’ (Hindi Song from Film ‘Shor’) 
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Sanskrit Version Lyrics : Dr. Harekrishna Meher
एकं प्रणय-गीतम् : डॉ. हरेकृष्ण मेहेर 
(Winner in Sanskrit Lyric Translation Competition conducted by
‘Vaartaavali’ Sanskrit Weekly Magazine of DD NEWS Channel, Delhi)
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Singer :  Sarita Bhave  (as shown in the program) 
* 
Produced by : DD NEWS and Telecast
on 10 Dec. 2016, Saturday at 7 pm. and 11 December 2016, Sunday at 12.30 pm.
Video : YouTube: 
Link : (Sanskrit Version Song): 
Dr. Harekrishna Meher : FaceBook : 
Link : 
https://www.facebook.com/harekrishna.meher.7/posts/1640550902637779?pnref=story
*
Watch 'Sanskrit Vaaraavali' : YouTube : 
Link : 
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Vaartaavali (Separately posted on FaceBook Timeline): 
Spardhageet  Ek Pyaar Ka Nagma Hai : 
Link :  
https://www.facebook.com/994742420623516/videos/1124296557668101/
* 
Full Episode ‘Vaartaavali’ : YouTube : 
Link : 
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हिन्दी-चलचित्रम् : ‘शोर’
गीत-रचना :  सन्तोष आनन्दः 
सङ्गीतम् :  लक्ष्मीकान्त-प्यारेलालौ
गायनम् :  लता-मङ्गेशकर: मुकेशश्च 
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संस्कृतानुवादकः - डॉ. हरेकृष्ण-मेहेरः  
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एकं प्रणय-गीतम् ,    
लहरीणां रयोऽस्तीदम् । 
जीवनं न किञ्चिदपरम्,
तव ममैव गाथेयम्  ॥ (०)
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प्राप्ते हि भवेन् नष्टम् , नष्टे च भवेत् प्राप्तम् ।
जीवन-तात्पर्यमिदम् , आगमनं च प्रस्थानम् ।
द्विक्षणात्मक-जीवनतो  वरमायुरेकं हार्यम् । 
जीवनं न किञ्चिदपरम् ,  
तव ममैव गाथेयम्  ॥ (१)
*
त्वं धारा खलु नद्याः, अस्मि ते प्रतीरमहम् ।
त्वं भासि सहायो मे, तेऽप्यस्मि सहायोऽहम् ।
अम्भोधिः स्थितो नयने, आशानां जलं पूर्णम् ।
जीवनं न किञ्चिदपरम् ,
तव ममैव गाथेयम्  ॥ (२)
*
वात्या हि समायात्री,  आगत्य च गन्त्री सा ।
स्वल्पायुः पयोभृदयम् , आच्छाद्य लयं गन्ता ।
अवशिष्यते तच्छाया, अवशिष्यते तच्चिह्नम् ।
जीवनं न किञ्चिदपरम् ,  
तव ममैव गाथेयम्  ॥ (३) 
*
यत् सान्त्वयति स्वान्तम् , तदुद्धृत्यानय वाद्यम् ।
श्वसनस्य हि रोधात् प्राक् , उत्तोलय कण्ठ-रवम् ।
स्वर-माधुर्यं  प्रमुदानाम् , अश्रूणामिदं  वचनम् ।
जीवनं न किञ्चिदपरम् ,  
तव ममैव गाथेयम्  ॥ (४) 
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Original Hindi Song ‘Ek Pyaar Ka Nagma Hai’.
Film : ‘Shor’ (1972) 
Lyrics : Santosh Anand
Music : Laxmikant Pyarelal
Singers: Lata Mangeshkar and Mukesh  
Complete Hindi Song : Youtube : 
Link :  
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एक प्यार का नगमा है,  मौजों की रवानी है ।   
जिन्दगी और कुछ भी नहीं, 
तेरी मेरी कहानी है ॥ (०)
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कुछ पाकर खोना है,  कुछ खोकर पाना है  ।
जीवन का मतलब तो, आना और जाना है  ।
दो पल के जीवन से,  एक उम्र चुरानी है ।  
जिन्दगी और कुछ भी नहीं, 
तेरी मेरी कहानी है ॥ (१)
*
तू धार है नदिया की,  मैं तेरा किनारा हूँ ।
तू मेरा सहारा है,  मैं तेरा सहारा हूँ ।  
आंखों में समन्दर है, आशाओं का पानी है ।
जिन्दगी और कुछ भी नहीं, 
तेरी मेरी कहानी है ॥ (२)
*
तूफान को आना है,  आकर चले जाना है ।
बादल है ये कुछ पल का, छाकर ढल जाना है ।  
परछाइयाँ रह जाती, रह जाती निशानी है ।  
जिन्दगी और कुछ भी नहीं, 
तेरी मेरी कहानी है ॥ (३)
*
जो दिल को तसल्ली दे, वो साज उठा लाओ ।
दम घुटनेसे पहले ही,  आवाज़ उठा लाओ ।
खुशियों का तरन्नुम है, अशकों की जवानी है ।
जिन्दगी और कुछ भी नहीं, 
तेरी मेरी कहानी है ॥ (४)  
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* Videos of Dr. Harekrishna Meher :
Youtube : Link :
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Biodata :
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Chalachitra-Gita-Sanskritayanam (Anthology of Sanskrit Version Film Songs)  
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