Wednesday, September 20, 2023

Nuakhai Song * नूआंखाइ गीत * "Mangal Tihaar Nuakhai" : Dr.Harekrishna Meher

Nuakhai Song * नूआंखाइ गीत * 
"Mangal Tihaar Nuakhai" : 
Lyrics and Tuning by :  Dr Harekrishna Meher 
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* नूआंखाइ गीत * 
कोसली गीत-रचना एवं स्वर-रचना: 
डा. हरेकृष्ण मेहेर 
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आएला, मंगल् तिहार् नूआंखाइ गो, 

आएला तिहार् नूआंखाइ ।  

नूआं, खाएमुं खुसिर् गीत् गाइ गो,  

मंगल् तिहार् नूआंखाइ गो ।। (०) 
*

धरती मांआर् पूजा   करमुं शरधा भरि 

       चाषी भाइर् मन् उल्लास । 

गण परब् एभे      आसिअछे शुभे 

    मांआ भाइ बहेन् आस गो । 

      लक्ष्मी मांआर् चरने, 

करमुं पार्थना आनन्द मने गो । 

आएला तिहार् नूआंखाइ । 

नूआं, खाएमुं खुसिर् गीत् गाइ गो, 

मंगल् तिहार् नूआंखाइ ।। (१) 

*
घरे घरे सबे     केते मउज् करबे 

   पिठापना खीरि रन्धा । 

घर् दुआर् सजा   केते हंसि मजा 

  नूआं नूआं बस्तर् पिन्धा गो । 

    भाबर् डोरिने बन्धा, 

दु:खे सुखे सबे भाइ ददा गो । 

मंगल् तिहार् नूआंखाइ । 

नूआं, खाएमुं खुसिर् गीत् गाइ गो, 

मंगल् तिहार् नूआंखाइ ।। (२) 

*
इष्ट देबादेबी    पूजा संगे अर्पन् 

  करमुं नूआं अरन् आहार् । 

बुआ मांआ आरु   गुरुजन मानकर् 

  पादे आमर् भक्ति जुहार् गो । 

   बड़ु बड़मां दादा आई, 

  कका, काकी जेते बोहू भाइ गो। 

सबके, मुड़िआ पाशे थाइ । 

नूआं, खाएमुं खुसिर् गीत् गाइ गो

मंगल् तिहार् नूआंखाइ ।। (३)

बन्धुबान्धब् मानके  नूआंखाइ जुहार् 

     करि आशीर्बाद् पाएमुं, 

सान मानके आमर्   सेनेह शरधा 

     सेबा जतन् करुथिमुं गो । 

गाआंने सहरे नूआंखाइ, 

अछे, सबु हुर्दे भाब् छाइ गो,   

मंगल् तिहार् नूआंखाइ । 

जए, जए देबी समलाई मां, 

मंगल् तिहार् नूआंखाइ । 

भले, रखिथिबे महामायी मां, 

आएला तिहार् नूआंखाइ । 

नूआं, खाएमुं खुसिर् गीत् गाइ गो,  

मंगल् तिहार् नूआंखाइ ।। (४) 

 *

कृषि-परब् महान्   नबान्न नूआं धान्  

    सेबन् कर्बार् शुभ् लगन्, 

आमर् कृषिप्रधान्  देश् भारत् महान् 

   परम्परा चालिचलन् गो, 

 उछब्, मंगल् नूआंखाइ । 

खुसि, खेतुं नूआं धान् पाइ गो ।

मंगल् तिहार्  नूआंखाइ । 

जुहार्, माटि मांआर् कोले थाइ गो । 

मंगल् तिहार् नूआंखाइ ।। (५) 

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Saturday, September 16, 2023

Regarding "Jayatu Janani" (जयतु जननी) Sanskrit Song of Dr.Harekrishna Meher

/* "जयतु जननी" देशभक्तिगीत के बारे में * हरेकृष्ण मेहेर 

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कुछ परिचित व अपरिचित सज्जनों के वार्त्तालाप से ज्ञात हुआ कि मेरा रचित संस्कृत गीत "जयतु जननी" हमारे भारतवर्ष के विभिन्न स्थानों में विभिन्न प्रतियोगिताओं में  मुख्यत: छात्र-छात्राओं द्वारा परिवेषण किया जा चुका है एवं किया जा रहा है । यह बहुत खुशी और प्रसन्नता का विषय है । सभीको मेरा आन्तरिक धन्यवाद एवं आभार व्यक्त करता हूं ।

पता चला है कि किसीने मूलगीत के कुछ शब्दों को मनमानी परिवर्त्तित कर दिया है । कुछ गीत-संकलन पुस्तकों में यह गीत प्रकाशित हुआ है । मूल लेखक को इसके बारे में कोई सूचना नहीं दी गई है । शुद्ध गीत को अशुद्ध कर दिया गया है । यह कार्य सर्वथा अनुचित है । कुछ मनमानी परिवर्त्तित शब्दों में व्याकरण की दृष्टि से अशुद्धि है और छन्द की दृष्टि से भी ।
जैसे,
(१) मूलशब्द 'हिमगिरि-शिखा' के स्थान पर 'शिखा-हिमगिरि' कर दिया गया है ।
(२) मूलशब्द 'रम्य-गङ्गा-सङ्ग-यमुना' के स्थान पर 'रम्य-गङ्गा-यमुनया सह' कर दिया गया है ।
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अन्यत्र फिर (३) मूलशब्द 'महानदीह' के स्थान पर 'महानद्यथ' कर दिया गया है ।
(४) मूलशब्द 'मानविकता-प्रेम-गीतं ' के स्थान पर 'मानवानां प्रेम-गीतं ' कर दिया गया है । इस प्रकार मनमानी परिवर्त्तन नितान्त अनुचित एवं अनावश्यक हस्तक्षेप है । जिसने भी परिवर्त्तन किया है, गीत और गीतकार के विचार से अच्छा नहीं किया है । जो हो गया है, उसे छोड़ दीजिए ।
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मूल शुद्ध गीत "जयतु जननी" अधोलिखित रूप में प्रस्तुत है । सुधी संगीतज्ञों से सादर अनुरोध है, कृपया सुविधानुसार अपरिवर्त्तित रूप में इसका सदुपयोग करें । स्वर-रचना किसी राग में अपनी सुविधानुसार कर सकते हैं । रूपक ताल (३+२+२=७ मात्रा) या दीपचन्दी ताल (७+७=१४) में गीत परिवेषणीय है । चाहें तो कहरवा ताल (४+४=८) में भी गीत प्रस्तुत किया जा सकता है ।
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गीत के प्रकाशन के बारे में * 
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"जयतु जननी" गीत पहले 'मातृगीतिका' शीर्षक में अधिक दो अन्तरा-पदों के साथ १९९० में केन्द्र साहित्य अकादमी दिल्ली की "संस्कृत-प्रतिभा" मुखपत्रिका में प्रकाशित हुआ था । बाद में भारतीय विद्याभवन, मुम्बई की "संविद्" पत्रिका में प्रकाशित हुआ । १९९३ में गीतकार की (मेरी) अनुमति व स्वीकृति लेकर "गेयसंस्कृतम्" (बेंगलुरु) के तत्कालीन सम्पादक महोदय ने गीत के ध्रुवपद एवं तीन अन्तरा-पदों को लेकर उसे "जयतु जननी" शीर्षक में प्रकाशित किया । बाद में कुछ गीत-संकलन पुस्तकों में यह गीत प्रकाशित है । कहीं कहीं कुछ परिवर्त्तित अशुद्ध रूप में । यह बात बिलम्ब से मुझे ज्ञात हुई ।

संपृक्त संकलित पुस्तकों के संपादक महोदयों से सादर निवेदन है, जहां अशुद्ध छपा है, कृपया अगले संस्करण में मूल शुद्धरूप गीत प्रकाशित करके गीत की तथा जन्मभूमि की मर्यादा सुप्रतिष्ठित रखेंगे ।
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पता चला, "गेयसंस्कृतम्" (संस्कृत भारती, बेंगलुरु) पुस्तक का पुनर्मुद्रण हुआ है २०१० में । पूर्ववत् उसमें मूल शुद्धरूप गीत प्रकाशित है । उसका फोटोकॉपी नीचे संलग्न है । कृपया उसीके अनुसार गीत का सदुपयोग करेंगे । सादर ससम्मान हार्दिक धन्यवाद ।
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"जयतु जननी" (देशभक्तिगीत) :
गीतिकार : डा. हरेकृष्ण मेहेर 
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जयतु जननी    जन्मभूमि:
   पुण्य-भुवनं भारतम् ।
जयतु जम्बू-  द्वीपमखिलं
   सुन्दरं धामामृतम् ।
पुण्य-भुवनं भारतम् ।। (०)
*
धरित्रीयं       सर्व-दात्री
शस्य-सुफला शाश्वती,
रत्नगर्भा       कामधेनु:
कल्पवल्ली भास्वती ।
विन्ध्य-भूषा  सिन्धु-रशना
हिमगिरि-शिखा शर्मदा,
रम्य-गङ्गा-    सङ्ग-यमुना
  महानदीह नर्मदा ।
कर्म-तपसां    सार्थ-तीर्थं
प्रकृति-विभवालङ्कृतम् ।
जयतु जम्बू-  द्वीपमखिलं
  सुन्दरं धामामृतम् ।
पुण्य-भुवनं भारतम् ।। (१)
*
आकुमारी-   हिमगिरे-र्नो
  लभ्यते सा सभ्यता,
एक-मातु:     सुता: सर्वे
भाति दिव्या भव्यता ।
यत्र भाषा-    वेष-भूषा-
रीति-चलनै-र्विविधता,
तथाप्येका     ह्यद्वितीया
  राजते जातीयता ।
ऐक्य-मैत्री-   साम्य-सूत्रं
  परम्परया सम्भृतम् ।
जयतु जम्बू- द्वीपमखिलं
  सुन्दरं धामामृतम् ।
पुण्य-भुवनं भारतम् ।। (२)
*
आत्मशिक्षा-   ब्रह्मदीक्षा-
  ज्ञान-दीपैरुज्ज्वलम्,
योग-भोग-    त्याग-सेवा-
शान्ति-सुगुणै: पुष्कलम् ।
यत् त्रिरङ्गं   ध्वजं विदधत्
    वर्षमार्षं विजयते,
सार्वभौमं       लोकतन्त्रं
   धर्मराष्ट्रं गीयते ।
मानविकता-    प्रेम-गीतं
विबुध-हृदये झङ्कृतम् ।
जयतु जम्बू- द्वीपमखिलं
  सुन्दरं धामामृतम् ।
पुण्य-भुवनं भारतम् ।। (३)
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"जयतु जननी" * मूल संस्कृत गीत एवं हिन्दी भावानुवाद : डा. हरेकृष्ण मेहेर

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http://hkmeher.blogspot.com/2023/09/jayatu-janani-sanskrit-song-by.html?m=1
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Song Presented in a Competition:

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Biodata (English) : Web Version: 

http://hkmeher.blogspot.com/2012/06/brief-biodata-english-dr-harekrishna.html?m=0
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Thursday, September 14, 2023

Jayatu Janani : जयतु जननी (देशभक्तिगीत): Sanskrit Song by Dr.Harekrishna Meher

JAYATU JANANI (Sanskrit Patriotic Song)
Lyrics and Tuning: Dr. Harekrishna Meher
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"जयतु जननी" (देशभक्तिगीतम्) : 
गीति-रचना एवं स्वर-रचना : डा. हरेकृष्ण-मेहेर:
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जयतु जननी    जन्मभूमि:
   पुण्य-भुवनं भारतम् ।
जयतु जम्बू-    द्वीपमखिलं
    सुन्दरं धामामृतम् ।
   पुण्य-भुवनं भारतम् ।। (०)
*
धरित्रीयं        सर्व-दात्री
शस्य-सुफला शाश्वती,
रत्नगर्भा        कामधेनु:
कल्पवल्ली भास्वती ।
विन्ध्य-भूषा  सिन्धु-रशना
हिमगिरि-शिखा शर्मदा,
रम्य-गङ्गा-     सङ्ग-यमुना
    महानदीह नर्मदा ।
कर्म-तपसां    सार्थ-तीर्थं
प्रकृति-विभवालङ्कृतम् ।
जयतु जम्बू-  द्वीपमखिलं
   सुन्दरं धामामृतम् ।
पुण्य-भुवनं भारतम् ।। (१)
*
आकुमारी-   हिमगिरे-र्नो
  लभ्यते सा सभ्यता,
एक-मातु:      सुता: सर्वे
भाति दिव्या भव्यता ।
यत्र भाषा-     वेष-भूषा-
रीति-चलनै-र्विविधता,
तथाप्येका      ह्यद्वितीया
    राजते जातीयता ।
ऐक्य-मैत्री-    साम्य-सूत्रं
   परम्परया सम्भृतम् ।
जयतु जम्बू-  द्वीपमखिलं
    सुन्दरं धामामृतम् ।
पुण्य-भुवनं भारतम् ।। (२)
*
आत्मशिक्षा-    ब्रह्मदीक्षा-
   ज्ञान-दीपैरुज्ज्वलम्,
योग-भोग-     त्याग-सेवा-
शान्ति-सुगुणै: पुष्कलम् ।
यत् त्रिरङ्गं   ध्वजं विदधत्
    वर्षमार्षं विजयते,
सार्वभौमं        लोकतन्त्रं
     धर्मराष्ट्रं गीयते ।
मानविकता-    प्रेम-गीतं
विबुध-हृदये झङ्कृतम् ।
जयतु जम्बू-  द्वीपमखिलं
    सुन्दरं धामामृतम् ।
पुण्य-भुवनं भारतम् ।। (३)
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(इयं गीति: रूपक-तालस्य अथवा दीपचन्दी-तालस्य अथवा कहरवा-तालस्य मध्यलयेन परिवेषणीया।)

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"जयतु जननी" * संस्कृत देशभक्तिगीत 

(मूलगीत एवं हिन्दी भावानुवाद : डा. हरेकृष्ण मेहेर)
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हमारी जननी, जन्मभूमि, पुण्यभूमि  भारतवर्ष की जय हो । समग्र जम्बूद्वीप की जय हो । सुन्दर अमृतधाम भारतवर्ष की जय हो । प्यारी भारत-माता को हमारा सादर वन्दन ।।  (०)
*
यह धरती,भारतभूमि, हमें सब कुछ प्रदान करती है । धान्यादि शस्यों से, फलों से समृद्ध है यह चिरन्तन भूमि । इसके गर्भ में कई मणिरत्न भरे हुए हैं । कामधेनु-स्वरूपा भारत-माता वांछित फलदायिनी है । यह तेजोमयी कल्पलता-स्वरूपा है, अभिलाषा पूर्ण करती है । हमारी यह मातृभूमि  विन्ध्यपर्वत से विभूषित है । समुद्र इसकी रशना (कटिसूत्र) है अर्थात् यह समुद्र-वेष्टित है । हिमालय इसका मस्तक है । यह सुख-शान्तिदायिनी है । यहां सुन्दर गंगानदी के संग यमुना बहती है, महानदी है, नर्मदा है और भी । हमारा यह भारत कर्म और तपस्या का सार्थक तीर्थरूप है । विपुल प्राकृतिक संपदाओं से सुशोभित है । हमारी प्यारी जन्मभूमि, मातृभूमि, पुण्यभूमि, सुन्दर अमृतधाम भारतवर्ष की जय हो ।। (१)
*
कन्याकुमारी से हिमालय पर्यन्त हमारी प्रसिद्ध सभ्यता परिव्याप्त है । हम सब एक भारत-माता की सन्तानें हैं । यहां दिव्य भव्यता प्रतिभात होती है । यहां भारतवासी लोगों में भाषा, वेशभूषा, सामाजिक रीति, लोकाचार आदि में कुछ विविधता है, फिर भी एक ही जातीयता अर्थात् राष्ट्रीय भाव, भारतीयता अद्वितीय रूप में विराजमान है । एकता, मैत्री और समानता की संबन्ध-डोरी परम्परा से सभीको सम्मिलित करके सुदृढ़ रही है । हमारी प्यारी जन्मभूमि, मातृभूमि, पुण्य-भूमि, सुन्दर अमृतधाम भारतवर्ष की जय हो ।। (२)
*
आत्मतत्त्व-शिक्षा, ब्रह्मविषयक दीक्षा और ज्ञानरूप प्रदीप से समुज्ज्वल है हमारा भारत । यह योग, भोग, त्याग, सेवा, शान्ति आदि सद्गुणों से सुसम्पन्न है । ऋषिमुनियों का देश हमारा यह भारतवर्ष तिरंगा पताका धारण करके विजयशाली है । हमारा भारतदेश सार्वभौम, गणतन्त्र एवं धर्मराष्ट्र के रूप में दुनिया में यशस्वी और प्रख्यात है । यहां मानवता-रूप प्रेम का गीत सुधीजनों के हृदय में सदा झंकृत होता है । हमारी प्यारी जन्मभूमि, मातृभूमि, पुण्यभूमि, सुन्दर अमृतधाम भारतवर्ष की जय हो । भारत-माता को हमारा सादर वन्दन ।। (३)
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डा. हरेकृष्ण-मेहेर
(सेवानिवृत्त संस्कृत प्राध्यापक) 
दूरभाष : 9437362962.
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About Publication of Sanskrit Patriotic Song "Jayatu Janani " :
https://hkmeher.blogspot.com/2023/09/regarding-jayatu-janani-sanskrit-song.html
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Patriotic Songs and Poems:
http://hkmeher.blogspot.com/2016/07/patriotic-songs-and-poems-of.html?m=1
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Biodata English :  
http://hkmeher.blogspot.com/2012/06/brief-biodata-english-dr-harekrishna.html
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Biodata (English) : Web Version:
http://hkmeher.blogspot.com/2012/06/brief-biodata-english-dr-harekrishna.html?m=0
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Biodata: English-Hindi-Sanskrit-Odia :
https://hkmeher.blogspot.com/2022/08/biodata-english-hindi-odia-sanskrit.html?m=1
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Literary Works of Dr.Harekrishna Meher:  

http://hkmeher.blogspot.com/2018/09/literary-works-of-dr-harekrishna-meher.html
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Literary Awards and Felicitations to Dr.Harekrishna Meher:

http://hkmeher.blogspot.com/2018/09/literary-awards-and-felicitations-to-dr.html
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Sunday, September 10, 2023

"VYASA-BHARATI SAMMAN" (2023): 'व्यासभारती-सम्मान' Conferred on Dr.Harekrishna Meher

"VYASA-BHARATI SAMMAN - 2023"
Awarded to Dr. Harekrishna Meher 
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"व्यासभारती-सम्मान-२०२३"
has been conferred on Dr. Harekrishna Meher for his remarkable contributions to Sanskrit Literature
By
महर्षिव्यासदेव-राष्ट्रिय-प्राच्यविद्या-गवेषणाकेन्द्रम्, Vedavyasa, Rourkela, Odisha on 4 September 2023.

The Award was given during 'World Sanskrit Day Celebration' and National Seminar on the topic "Influence of Sanskrit on Poet  Gangadhara's Literature"
held in Gangadhar Meher University, Sambalpur, Odisha.
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Hearty thanks and gratitude to the Research Institute of Rourkela and the University for conferring this prestigious national Award.
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Literary Works of Dr.Harekrishna Meher:  
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Literary Awards and Felicitations to Dr.Harekrishna Meher:

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