Saturday, November 17, 2018

‘Teri Galiyon Me Na Rakhenge Kadam’: Sanskrit Version (Lyrics: न्यस्तं न करिष्ये ते रथ्यायां पदम् : Dr. Harekrishna Meher


Original Hindi Film Song : 
‘Teri Galiyon Me Na Rakhenge Kadam, Aaj Ke Baad’ *
तेरी गलियों में ना रखेंगे कदम, आज के बाद * (Film ‘Hawas’ 1974) 
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Sanskrit Translation by : Dr.Harekrishna Meher
(As per Original Hindi Tune)
Sanskrit Version Lyrics : 
न्यस्तं न करिष्ये ते रथ्यायां पदम्, अद्य पश्चात् *  
‘Nyastam Na Karishye Te Rathyaayaam Padam, Adya Pashchat’  
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Sanskrit Singer: Anand Joshi (New Delhi) 
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Winner in Sanskrit Lyric Translation Competition
Conducted by Sanskrit Vaartaavali, DD News Channel, Delhi.
Program Telecast on 17 November 2018, Saturday at 7 pm.
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For pleasure of reading, my translation is placed here.
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हिन्दीगीत : तेरी गलियों में ना रखेंगे कदम *
चलचित्र : हवस  (१९७४) *  
मूलस्वरानुकूल-संस्कृतानुवादकः : डॉ. हरेकृष्ण-मेहेरः *
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न्यस्तं न करिष्ये ते रथ्यायां पदम् । अद्य पश्चात् ।
न्यस्तं न करिष्ये ते, रथ्यायां पदम् । अद्य पश्चात् ।
कान्ते ! मिलनार्थं ते, नायास्याम्यहम् । अद्य पश्चात् ।
न्यस्तं न करिष्ये ॥ (०)  
*
मेलनमासीद् मे…, 
मेलनमासीद् मे एकः स्वप्नो जानीहि त्वम् ।
यस्ते स्वः आसीत् खलु त्वां प्राप्तः साम्प्रतम् ।
मेलनमासीद् मे एकः, स्वप्नो जानीहि त्वम् ।
यस्ते स्वः आसीत् खलु  त्वां प्राप्तः साम्प्रतम् ।
लोके त्वमवेहि, प्रियं मां नो स्वकम्  । अद्य पश्चात्   
न्यस्तं न करिष्ये ते, रथ्यायां पदम् । अद्य पश्चात् ।
न्यस्तं न करिष्ये ॥ (१)
*
पुनरायास्यन्ती…, 
पुनरायास्यन्ती घनाली व्याप्य श्रावणी ।
त्वं हि भवित्री, स्वप्रियस्य बाहूत्सङ्गिनी ।
पुनरायास्यन्ती घनाली, व्याप्य श्रावणी ।
त्वं हि भवित्री स्वप्रियस्य, बाहूत्सङ्गिनी ।
करिष्ये कण्ठे, प्रिये ! दुःखाश्लेषम् । अद्य पश्चात् ॥
न्यस्तं न करिष्ये ते, रथ्यायां पदम् । अद्य पश्चात् ।
कान्ते ! मिलनार्थं ते, नायास्याम्यहम् । अद्य पश्चात् ।
न्यस्तं न करिष्ये ॥ (२)
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FaceBook : Link :

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Original Hindi Song : ‘Teri Galiyon Me Na Rakhenge Kadam’
Film : Hawas (1974)
Lyrics : Saawan Kumar * Music : Usha Khanna *   
Singer : Mohammad Rafi *
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तेरी गलियों में ना, रखेंगे कदम, आज के बाद  । 
तेरी गलियों में ना रखेंगे कदम, आज के बाद  ।  
तेरे मिलने को ना, आएंगे सनम, आज के बाद  ॥ 
तेरी गलियों में  ॥ (०)
*
तू मेरा मिलना…,  
तू मेरा मिलना समझ लेना, एक सपना था,
तुझको अब मिल ही गया, जो तेरा अपना था ।
तू मेरा मिलना समझ लेना, एक सपना था,
तुझको अब मिल ही गया, जो तेरा अपना था ।
हमको दुनिया में, समझना ना सनम, आज के बाद ।
तेरी गलियों में ना रखेंगे कदम, आज के बाद ॥
तेरी गलियों में  ॥ (१)
*
घिर के आएंगी…,
घिर के आएंगी घटायें  फ़िर से सावन की,
तुम तो बाहों में, रहोगी अपने साजन की ।  
घिर के आएंगी घटायें  फ़िर से सावन की,
तुम तो बाहों में, रहोगी अपने साजन की । 
गले हम ग़म को, लगाएंगे सनम, आज के बाद ।  
तेरी गलियों में ना रखेंगे कदम, आज के बाद ।
तेरे मिलने को ना आएंगे सनम, आज के बाद ॥
तेरी गलियों में  ॥ (२)  
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Related Links :
‘Chalachitra-Gita-Sanskritaayanam’: चलचित्र-गीत-संस्कृतायनम्  :
* * *
Biodata (English) : Dr. Harekrishna Meher : 
* * * 
YouTube Videos (Search): Dr. Harekrishna Meher :
* * * 
VIDEOS of Dr.Harekrishna  Meher : 
Link : 
* * * 
Dr. Harekrishna Meher on Radio and Doordarshan Channels: 
Link : 
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Contributions of Harekrishna Meher to Sanskrit Literature :  
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Wednesday, November 14, 2018

कुमारसम्भव: Kumara-Sambhava (Canto-8th): Odia Version: Scanned Pages: Dr. Harekrishna Meher

Kumara-Sambhava Mahakavya *  
Original Sanskrit Epic Poem By : Mahakavi Kalidasa
Odia Metrical Translation By : Dr. Harekrishna Meher
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Canto-8 (Ashtama Sarga):
Depiction of Union of Lord Siva and Parvati   
(Taken from Complete Odia Version done in 1971)
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कुमारसम्भव महाकाव्य  
मूल संस्कृत काव्य : महाकवि कालिदास *
ओड़िआ पद्यानुवाद : डॉ. हरेकृष्ण मेहेर 
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अष्टम सर्ग : शिव-पार्वती-मिलन-वर्णना  
ओड़िआ छन्दरे अनूदित : राग: खण्डकुम्भकामोदी  
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Published in BARTIKA (बर्त्तिका), Literary Odia Quarterly,
Dashahara Special Issue, October-December 2009, Pages 283-293.
Saraswata Sahitya Sanskrutika Parishad, Dasharathpur, Jajpur, Odisha.
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Scanned Pages from Bartika magazine are posted here.
Some Verses bearing descriptions of Eros have been avoided.
Courtesy : BARTIKA *
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Saturday, November 10, 2018

Kumara-Sambhava (Canto-1): Odia Version: Odia Script Scanned Pages: Dr.Harekrishna Meher

Kumara-Sambhava Mahakavya * 
Original Sanskrit Epic Poem : Mahakavi Kalidasa 
Odia Metrical Translation : Dr. Harekrishna Meher
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Canto-1 (Prathama Sarga):
Depiction of Himalaya Mountain and Parvati's Birth
(Taken from Complete Odia Version)
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Published in BARTIKA (बर्त्तिका), Literary Odia Quarterly,
Dashahara Special Issue, October-December 2005, Pages 533-552.
Saraswata Sahitya Sanskrutika Parishad, Dasharathpur, Jajpur, Odisha.
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कुमारसम्भव महाकाव्य *
मूल संस्कृत काव्य : महाकवि कालिदास *
ओड़िआ पद्यानुवाद : डॉ. हरेकृष्ण मेहेर
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प्रथम सर्ग : हिमालय-वर्णना एवं पार्वती-जन्म * 
ओड़िआ छन्दरे अनूदित : राग रामकेरी  
अनुवाद काल : १९७१ ख्रीष्टाब्द
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 Total Canto-1 : Devanagari Script : Blog Link :
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FaceBook Link :

Related Links :
Kumara-Sambhava : Odia Version by Dr. Harekrishna Meher : 
*
Translated Works of Dr. Harekrishna Meher : 
(Tapasvini, Niti-Sataka, Sringara-Sataka, Vairagya-Sataka, 
Kumara-Sambhava, Raghuvamsha, Ritusamhara, Naishadha, 
Gita-Govinda, Meghaduta etc.) 
Link: 
http://hkmeher.blogspot.in/2016/08/translated-works-of-dr-harekrishna-meher.html
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Here posted
Odia Print : All Scanned Pages from Bartika Magazine:
October-December 2005 :
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