Saturday, May 9, 2020

Apane Liye Jiye To Kya Jiye : Sanskrit Version (Lyrics: स्वकृते जीवेत्, किं तर्हि जीवनम्): Dr.Harekrishna Meher : DDNews Vaartavali

Original Hindi Film Song : Apane Liye Jiye To Kya Jiye’ *
अपने लिये, जीये तो क्या जीये *  (Film ‘BADAL’ 1966) 
*
Sanskrit Translation by : Dr.Harekrishna Meher
(As per Original Hindi Tune)
Sanskrit Version Lyrics : स्वकृते जीवेत्, किं तर्हि जीवनम् *
‘Svakrite Jivet, Kim Tarhi Jivanam’  
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Winner in Sanskrit Lyric Translation Competition
Conducted by Sanskrit Vaartaavali, DD News Channel, Delhi.
Song Program Telecast on 9 May 2020, Saturday at 6 pm.
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DD NEWS Vaartavali Telecast: 
Video Link : 
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हिन्दीगीत : अपने लिये, जीये तो क्या जीये * (चलचित्रम् : बादल)
मूलस्वरानुकूल-संस्कृतानुवादकः - डॉ. हरेकृष्ण-मेहेरः 
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स्वार्थपरे संसारेऽयम्, मनुजस्य वै सुपरिचयः ।
योऽपरस्मिन् पावके, ज्वलितोऽस्ति, एष हि मानवः ॥
*
स्वकृते जीवेत्, किं तर्हि जीवनम् ।
स्वकृते जीवेत्, किं तर्हि जीवनम् ।
जीवेः, रे हृद् ! संसार-कृते त्वम् 
स्वकृते जीवेत्, किं तर्हि जीवनम् ।
स्वकृते जीवेत्, किं तर्हि जीवनम् ।
जीवेः, रे हृद् ! संसार-कृते त्वम् ॥
स्वकृते जीवेत्, किं तर्हि जीवनम् ॥ (०)
*
पण्याजिरात् जनानां वै, किञ्चिद् वयं न क्रेष्यामः ।
पण्याजिरात् जनानां वै, किञ्चिद् वयं न क्रेष्यामः ।
आम्, विक्रीय स्वमानन्दम्, क्लेशं लोकस्य क्रेष्यामः ।
क्षीण-दीपानां, ज्वालन-निमित्तम् ।
क्षीण-दीपानां, ज्वालन-निमित्तम् ।
जीवेः, रे हृद् ! संसार-कृते त्वम् ।
स्वकृते जीवेत्, किं तर्हि जीवनम् ॥ (१)
*
मानं जनो यो वेत्ति स्वकम्, परमेश्वरं स विज्ञाता ।
मानं जनो यो वेत्ति स्वकम्, परमेश्वरं स विज्ञाता ।
स्वाधीन-स्वभाव एव नरः, रीतिः कथं नु दास्यगता ।
शिरो न भवेद्, विधातुं विनतम् । 
शिरो न भवेद्, विधातुं विनतम् । 
जीवेः, रे हृद् ! संसार-कृते त्वम् ।
स्वकृते जीवेत्, किं तर्हि जीवनम् ॥ (२)
*
साहसमुदात्तमस्ति निजम्, प्रस्तर-निभाश्च प्राणा नः ।
साहसमुदात्तमस्ति निजम्, प्रस्तर-निभाश्च प्राणा नः ।
पदयोस्तले भुवं किं वा, आकाशमेव न्यस्यामः ।
पतितानां वै, उत्थान-निमित्तम् ।  
पतितानां वै, उत्थान-निमित्तम् । 
जीवेः, रे हृद् ! संसार-कृते त्वम् ।
स्वकृते जीवेत्, किं तर्हि जीवनम् ॥(३)
*
चल भास्करं च सह नीत्वा, चल रे ! निशाकरेण समम् । 
चल भास्करं च सह नीत्वा, चल रे ! निशाकरेण समम् ।  
एक-विघाते निजस्य बले, त्वं चल नयन् हि क्रान्ति-शतम् ।
अत्याचाराणां, निपात-निमित्तम् । 
अत्याचाराणां, निपात-निमित्तम् ।
जीवेः, रे हृद् ! संसार-कृते त्वम् ।
स्वकृते जीवेत्, किं तर्हि जीवनम् ॥ (४)
*
वैफल्यतो विभीतः सन्, स्वां कथमाशां च त्यजसि त्वम् ।
वैफल्यतो विभीतः सन्, स्वां कथमाशां च त्यजसि त्वम् ।
अहमस्मि ते हि सहयात्री, भजसे कथं नु प्रविषादम् ।
रमस्व हसन्, हासयितुं परम् ।
रमस्व हसन्, हासयितुं परम् ।
जीवेः, रे हृद् ! संसार-कृते त्वम् ।
स्वकृते जीवेत्, किं तर्हि जीवनम् ॥ (५)
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Original Hindi Song : ‘Apane Liye Jiye To Kya Jiye’
Film : Badal (1966)*  Lyrics : Javed Anwar *
Music : Usha Khanna * Singer : Manna Dey *  
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मूल-हिन्दीगीत : अपने लिये जीये तो क्या जीये *  
चलचित्र : बादल (१९६६) *  गीतकार : जावेद अनवर  *
सङ्गीतकार : उषा खन्ना *  गायक : मान्ना दे *
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खुदगर्ज दुनिया में ये, इनसान की पहचान है ।
जो परायी आग में, जल जाये, वो इनसान है ॥
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अपने लिये, जीये तो क्या जीये ।
अपने लिये, जीये तो क्या जीये ।
तू जी, ऐ दिल ! जमाने के लिये ॥
अपने लिये, जीये तो क्या जीये ।
अपने लिये, जीये तो क्या जीये ।
तू जी, ऐ दिल ! जमाने के लिये ॥
अपने लिये, जीये तो क्या जीये  ॥ (०)
*
बाजार से जमाने के, कुछ भी न हम खरीदेंगे ।
हाँ, बेचकर खुशी अपनी, लोगों के गम खरीदेंगे ।  
बाजार से जमाने के, कुछ भी न हम खरीदेंगे ।
हाँ, बेचकर खुशी अपनी, लोगों के गम खरीदेंगे । 
बुझते दीये, जलाने के लिये ।
बुझते दीये जलाने के लिये ।
अपने लिये, जीये तो क्या जीये ।
तू जी, ऐ दिल ! जमाने के लिये ॥
अपने लिये, जीये तो क्या जीये ॥ (१)
*
अपनी खुदी को जो समझा, उसने खुदा को पहचाना ।
अपनी खुदी को जो समझा, उसने खुदा को पहचाना ।
आजाद फितरत-ए-इनसान, अंदाज क्यों गुलामाना ।
सर ये नहीं, झुकाने के लिये ।   
सर ये नहीं, झुकाने के लिये ।
तू जी, ऐ दिल ! जमाने के लिये ॥
अपने लिये, जीये तो क्या जीये ॥ (२)  
‍*
हिम्मत बुलन्द है अपनी, पत्थर-सी जान रखते हैं ।
हिम्मत बुलन्द है अपनी, पत्थर-सी जान रखते हैं ।
कदमों तले जमीं तो क्या, हम आसमान रखते हैं ।  
गिरते हुओं को, उठाने के लिये ।
गिरते हुओं को, उठाने के लिये ।
तू जी, ऐ दिल ! जमाने के लिये ॥
अपने लिये, जीये तो क्या जीये ॥ (३)
*
चल आफताब लेकर चल, चल माहताब लेकर चल ।
चल आफताब लेकर चल, चल माहताब लेकर चल ।
तू अपनी एक ठोकर में, सौ इनकिलाब लेकर चल ।
जुल्मो सितम, मिटानेके लिये ।
जुल्मो सितम, मिटानेके लिये ।
तू जी, ऐ दिल ! जमाने के लिये ॥
अपने लिये, जीये तो क्या जीये ॥ (४)
*
नाकामियों से घबराके, क्यों अपनी आस खोते हो ।
नाकमियों से घबराके, क्यों अपनी आस खोते हो ।
मैं हमसफर  तुम्हारा हूँ, क्यों तुम उदास होते हो ।
हँसते रहो, हँसानेके लिये ।
हँसते रहो, हँसानेके लिये ।
तू जी, ऐ दिल ! जमाने के लिये ॥
अपने लिये, जीये तो क्या जीये ॥
तू जी, ऐ दिल ! जमाने के लिये ॥
अपने लिये, जीये तो क्या जीये ॥  (५)
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Related Links :
‘Chalachitra-Gita-Sanskritaayanam’: चलचित्र-गीत-संस्कृतायनम्  :
* * *
Biodata: Dr. Harekrishna Meher :
* * * 
YouTube Videos (Search): Dr. Harekrishna Meher :
* * * 
VIDEOS of Dr.Harekrishna  Meher : 
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Dr. Harekrishna Meher on Radio and Doordarshan Channels:
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Wednesday, May 6, 2020

*Odia Bhasha-Sahityaku Aanchalika Bhashara Abadana* Odia Article by: Dr.Harekrishna Meher

*Odia Bhasha-Sahityaku Aanchalika Bhashara Abadana*
(Pashchima Odisha Pariprekshire Eka Tulanatmaka Bichara)
Odia Article by: Dr.Harekrishna Meher
*
(English Title may be thus: 
*Contributions of Regional Languages to Odia Language and Literature*
 (A Comparative Discussion in the Perspective of Western Odisha)
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(This Paper was presented by the Author as an Invited Researcher in the Literary Seminar on the Topic *Odia Bhasha-Sahityaku Aanchalika Bhashara Abadana* Organised by Prajatantra Prachar Samiti, Bihari Bag, Chandini Chowk, Cuttack, on the occasion of Bishuba Milana Utsava on 13 April 2015. It was well discussed and highly appreciated by the learned audience.
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Reference of the Seminar Function :
Posted on FaceBook at that time :
*
Later on this Article was published in 
SAGAR (Half-Yearly Literary Magazine), 2nd Issue, 2018, Pages 77-84 
of Kalahandi Lekhak Kala Parishad, Bhawanipatna, Odisha.
All Scanned Pages of Article are posted here.
Hearty gratitude to the Seminar Organisers and the Editorial Board.
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Present Posting on FaceBook :




































































































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Friday, March 13, 2020

Pal Pal Dil Ke Paas Tum Rahati Ho: Sanskrit Version (Lyrics: हृद् मे अध्यास्से प्रतिनिमिषं त्वम्) : Dr.Harekrishna Meher

Original Hindi Film Song :
पल-पल दिलके पास तुम रहती हो * 
‘Pal Pal Dil Ke Paas Tum Rahati Ho’ * Film ‘Blackmail’ (1973)
*
Sanskrit Translation by : Dr. Harekrishna Meher
(As per Original Hindi Tune)
Sanskrit Version Lyrics :
हृद् मे अध्यास्से प्रतिनिमिषं त्वम् *
‘Hrid Me Adhyaasse Pratinimisham Tvam' * 
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मूलहिन्दीगीत : पल-पल दिल के पास तुम रहती हो * 
(चलचित्रम् : ब्लैकमेल् )
मूलस्वरानुकूल-संस्कृतानुवादकः - डॉ. हरेकृष्ण-मेहेरः
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हृद् मे अध्यास्से, प्रतिनिमिषं त्वम्
जीवनं मधु-तर्षंम्, त्वं वदसीदम् । 
हृद् मे अध्यास्से, प्रतिनिमिषं त्वम् ॥ (०)
*
अनुसायमधिनेत्रम्, तव वात्यञ्चल-लौल्यम्,   
स्मृति-पङ्क्तिरानीता, भात्येव प्रतिनक्तम् ।
श्वासं नयामि स्वम्, प्रसरति सौगन्धं ते,
सौरभ-युक्तमिवैकम्, सन्देशमावहते । 
मम हृदय-स्पन्दोऽपि ते, कुरुते गीतोद्‍गानम् ॥
हृद् मे अध्यास्से, प्रतिनिमिषं त्वम् ॥ (१)
*
लोकितवानासं ह्यो, निजाजिर-मध्येऽहं त्वाम्,
आसीरिव ब्रुवन्ती त्वम्, कुरु मां रज्ज्वा बद्धाम् ।
कीदृक् सम्बन्धोऽयम्, कीदृश एते स्वप्नाः,
कथमज्ञाता अपि वै, भासन्ते स्वीयजनाः ।
चिन्तारतो ननु चाहम्, सभयं निगदाम्येवम् ॥
हृद् मे अध्यास्से, प्रतिनिमिषं त्वम् ॥ (२)
*
त्वं चिन्तयितास्येतावत्, ते करवै प्रेम कथम्,
त्वं वेदिष्यसि मत्तोऽहम्, अपि स्वीकरवै प्रणयम् ।  
मत्तानामेतद् वृत्तम्, मत्ता जानन्ति सत्यम्,
ज्वलने सौख्यं किमास्ते, शलभा जानन्ति नूनम् ।
त्वं ज्वालय ह्येवं स्वप्ने, आगम्य मुहु-र्नित्यम् ॥
हृद् मे अध्यास्से, प्रतिनिमिषं त्वम्
जीवनं मधु-तर्षंम्, त्वं वदसीदम् । 
हृद् मे अध्यास्से, प्रतिनिमिषं त्वम् ॥ (३)
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Alternative Translation : 
हृद् मे अध्यास्से or हृदयम् अध्यास्से * 
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(Translated for popularisation and service to Sanskrit and the nation.
Courtesy and Acknowledgements: Film *Blackmail (1973)    
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हिन्दीगीत : पल-पल दिल के पास तुम रहती हो ‍*   
चलचित्र : ब्लैकमेल्  (१९७३) * गीतकार : राजेन्द्र कृष्ण *
सङ्गीतकार : कल्याणजी आनन्दजी *  गायक : किशोर कुमार *
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पल-पल दिल के पास, तुम रहती हो,
जीवन मीठी प्यास, ये कहती हो ।
पल-पल दिल के पास, तुम रहती हो ॥ (०)
*
हर शाम आँखों पर, तेरा आँचल लहराये,
हर रात यादों की  बारात ले आये ।
मैं साँस लेता हूँ,  तेरी खुशबू आती है ।
इक महका-महका-सा  पैगाम लाती है ।
मेरे दिल की धड़कन भी, तेरे गीत गाती है ॥
पल-पल दिल के पास, तुम रहती हो ॥ (१)
*
कल तुझको देखा था, मैंने अपने आँगन में,
जैसे कह रही थी तुम, मुझे बाँध लो बन्धन में ।
ये कैसा रिस्ता है, ये कैसे सपने हैं,
बेगाने होकर भी, क्यूँ लगते अपने हैं ।
मैं सोच में रहता हूँ, डर-डरके कहता हूँ ॥
पल-पल दिल के पास, तुम रहती हो ॥ (२)
*
तुम सोचोगी ये कैसे, मैं तुमसे प्यार करूँ,
तुम समझोगी दीवाना, मैं भी इकरार करूँ ।
दीवानों की ये बातें, दीवाने जानते हैं,
जलने में क्या मजा है, परवाने जानते हैं ।
तुम यूँ ही जलाते रहना, आ आकर  ख्वाबों में ॥
पल-पल दिल के पास, तुम रहती हो । 
जीवन मीठी प्यास, ये कहती हो ।
पल-पल दिल के पास, तुम रहती हो ॥ (३)
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Related Links :
‘Chalachitra-Gita-Sanskritaayanam’: चलचित्र-गीत-संस्कृतायनम्  :
* * *
Biodata: Dr. Harekrishna Meher :
* * *
YouTube Videos (Search): Dr. Harekrishna Meher :
* * * 
VIDEOS of Dr.Harekrishna  Meher : 
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Dr. Harekrishna Meher on Radio and Doordarshan Channels:
Link : 
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Monday, February 24, 2020

Rajyastariya Gangadhar Meher Smruti Samman -2020* Awarded to Dr.Harekrishna Meher

State Level Gangadhar Meher Memorial Award 

Dr. Harekrishna Meher, for his remarkable literary contributions
on the works of Swabhava-kavi Gangadhar Meher, was honoured with
*RAJYASTARIYA GANGADHAR MEHER SMRUTI SAMMAN - 2020*

Awarded by Gangadhar Meher Smruti Samiti and Rajajyoti Seva Samiti,
Titilagarh, Dist-Balangir, Odisha, on a special occasion of Award Giving
Ceremony held in the campus of Aum Valley School on 23 February 2020.
*
Hearty thanks and gratitude to both organizations for conferring this 
State Level Gangadhar Meher Memorial Award. 
On the dais were President Dr. Binod Bihari Jal (Retired Chemistry Prof.), 
Secretary Sj. Aswini Kumar Mohanty, Chief Guest Sj. Sudhakar Nayak (Sub-Collector), 
Sj. Badrinarayan Mishra (Principal of the School), Dr. Ghanashyam Jain and 
other dignitaries.  
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FaceBook Post :
Biodata :
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Awards and Felicitations :  
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Some Photosnaps of this occasion :  

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