Monday, February 24, 2020

Rajyastariya Gangadhar Meher Smruti Samman -2020* Awarded to Dr.Harekrishna Meher

State Level Gangadhar Meher Memorial Award 

Dr. Harekrishna Meher, for his remarkable literary contributions
on the works of Swabhava-kavi Gangadhar Meher, was honoured with
*RAJYASTARIYA GANGADHAR MEHER SMRUTI SAMMAN - 2020*

Awarded by Gangadhar Meher Smruti Samiti and Rajajyoti Seva Samiti,
Titilagarh, Dist-Balangir, Odisha, on a special occasion of Award Giving
Ceremony held in the campus of Aum Valley School on 23 February 2020.
*
Hearty thanks and gratitude to both organizations for conferring this 
State Level Gangadhar Meher Memorial Award. 
On the dais were President Dr. Binod Bihari Jal (Retired Chemistry Prof.), 
Secretary Sj. Aswini Kumar Mohanty, Chief Guest Sj. Sudhakar Nayak (Sub-Collector), 
Sj. Badrinarayan Mishra (Principal of the School), Dr. Ghanashyam Jain and 
other dignitaries.  
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FaceBook Post :
Biodata :
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Awards and Felicitations :  
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Some Photosnaps of this occasion :  

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Saturday, February 22, 2020

Maine Tere Liye Hi Saat Rang Ke Sapne Chune: Sanskrit Version (Lyrics: नैकं तुभ्यं हि स्वप्नं सप्तवर्णिलं चितवानहम्): Dr. Harekrishna Meher

Original Hindi Film Song :
मैंने तेरे लिये ही सात रंग के सपने चुने * 
Maine Tere Liye Hi Saat Rang Ke Sapne Chune’ * Film ‘Anand’ (1971)
*
Sanskrit Translation by :  Dr. Harekrishna Meher
(As per Original Hindi Tune)
Sanskrit Version Lyrics :
नैकं तुभ्यं हि स्वप्नं सप्तवर्णिलं चितवानहम् *     
‘Naikam Tubhyam Hi Svapnam Saptavarnilam Chitavaan Aham’ * 
*
Participated in Sanskrit Lyric Translation Competition
Conducted by Sanskrit Vaartaavali, DD News Channel, Delhi.
Name enlisted in the Program Telecast
on 22 February 2020, Saturday at 7 pm.
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मूलहिन्दीगीतम् : मैंने तेरे लिये ही सात रंग के सपने चुने *  
(चलचित्रम् : आनन्द)
मूलस्वरानुकूल-संस्कृतानुवादकः - डॉ. हरेकृष्ण-मेहेरः
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नैकम्,
नैकं तुभ्यं हि स्वप्नं सप्तवर्णिलं चितवानहम् ।
स्वप्नं, स्वराङ्कं स्वप्नम् । 
नैकं तुभ्यं हि स्वप्नं सप्तवर्णिलं चितवानहम् ।
स्वप्नं, स्वराङ्कं स्वप्नम् । 
किञ्चिद् हसितं, किञ्चिद् व्यथितं,
स्मृतयोऽपाहरन् हि रसालास्ते नेत्रच्छायाचयम्  ॥  
ओ, नैकं तुभ्यं हि स्वप्नं सप्तवर्णिलं चितवानहम् ।
स्वप्नं, स्वराङ्कं स्वप्नम्  ॥ (०)  
*
स्वल्पं वृत्तम्,
स्वल्प-स्वल्प-वृत्तानां विशाला स्मृतिः ।   
नो विस्मृता, वेला, प्रयातैका स्वल्पाकृतिः । 
स्वल्पं वृत्तम्,
स्वल्प-स्वल्प-वृत्तानां विशाला स्मृतिः ।   
नो विस्मृता, वेला, प्रयातैका स्वल्पाकृतिः ।  
जनी-जनीतो मार्गैश्च नेत्रं,
त्वदर्थमेतैः समास्तृतम् ॥
ओ, नैकं तुभ्यं हि स्वप्नं सप्तवर्णिलं चितवानहम् ।
स्वप्नं, स्वराङ्कं स्वप्नम् ॥ (१) 
*
रुष्टा निशाः,
रुष्टा निशाः कदाऽकुर्वि प्रीता अहम् ।
तुभ्यं कदा, उषां, सुमधुरां समाकारयम् । 
रुष्टा निशाः,
रुष्टा निशाः कदाऽकुर्वि प्रीता अहम् ।
तुभ्यं कदा, उषां, सुमधुरां समाकारयम् । 
त्वया विनापि, नूनं त्वदर्थं,
पीड़ा: प्रदीपान् प्राज्वालयन् ॥    
ओ, नैकं तुभ्यं हि स्वप्नं सप्तवर्णिलं चितवानहम् ।
स्वप्नं, स्वराङ्कं स्वप्नम् ॥ (२) 
*
हृदव्याजम्,
हृदव्याजं वारंवारं विनोदितम् । 
एकान्ते वै, ध्यातं, भावनाजातं ते सज्जितम् ।
हृदव्याजम्,
हृदव्याजं वारंवारं विनोदितम् ।
एकान्ते वै, ध्यातं, भावनाजातं ते सज्जितम् । 
कदा-कदाचित्  समाह्वयन्तः    
स्वप्ना अकुर्वन् मां जाग्रतम् ॥
ओ, नैकं तुभ्यं हि स्वप्नं सप्तवर्णिलं चितवानहम् ।
स्वप्नं, स्वराङ्कं स्वप्नम् । 
किञ्चिद् हसितं, किञ्चिद् व्यथितं,
स्मृतयोऽपाहरन् हि  रसालास्ते नेत्रच्छायाचयम्  ॥  
ओ, नैकं तुभ्यं हि स्वप्नं सप्तवर्णिलं चितवानहम् ।
स्वप्नं, स्वराङ्कं स्वप्नम्  ॥ (३)  
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Twitter Link :
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हिन्दीगीत : मैंने तेरे लिये ही सात रंग के सपने चुने *  
चलचित्र : आनन्द (१९७१) * गीतकार : गुलज़ार  *
सङ्गीतकार : सलिल चौधरी  *  गायक : मुकेश *
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मैंने,
मैंने तेरे लिये ही सात रंग के सपने चुने,
सपने सुरीले सपने ।
मैंने तेरे लिये ही सात रंग के सपने चुने,
सपने सुरीले सपने ।
कुछ हँसते, कुछ गम के,
तेरी आँखों के साये चुराये रसीली यादों ने ॥
हो, मैंने तेरे लिये ही सात रंग के सपने चुने,
सपने सुरीले सपने  ॥ (०)
*
छोटी बातें,
छोटी-छोटी बातों की हैं यादें बड़ी ।
भूले नहीं, बीती, हुई एक छोटी घड़ी ।
छोटी बातें,
छोटी-छोटी बातों की हैं यादें बड़ी । 
भूले नहीं, बीती, हुई एक छोटी घड़ी ।
जनम-जनम से, आँखें बिछायीं,
तेरे लिये इन राहों ने ॥
हो, मैंने तेरे लिये ही सात रंग के सपने चुने,
सपने सुरीले सपने  ॥ (२)
*
रूठी रातें,
रूठी हुई रातों को मनाया कभी ।
तेरे लिये, मीठी, सुबह को बुलाया कभी ।
रूठी रातें,
रूठी हुई रातों को मनाया कभी ।
तेरे लिये, मीठी, सुबह को बुलाया कभी ।
तेरे बिना भी, तेरे लिये ही,
दीये जलाये आहों ने ॥ 
हो, मैंने तेरे लिये ही सात रंग के सपने चुने,
सपने सुरीले सपने  ॥ (१) 
*
भोले-भाले, भोले-भाले दिल को बहलाते रहे,
तनहाई में, तेरे, खयालों को सजाते रहे ।
भोले-भाले, भोले-भाले दिल को बहलाते रहे,
तनहाई में, तेरे, खयालों को सजाते रहे ।
कभी-कभी तो आवाज़ देकर,
मुझको जगाया ख्वाबों ने ॥
हो, मैंने तेरे लिये ही सात रंग के सपने चुने,
सपने सुरीले सपने  ॥ (३)
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Related Links :
‘Chalachitra-Gita-Sanskritaayanam’: चलचित्र-गीत-संस्कृतायनम्  :
* * *
Biodata: Dr. Harekrishna Meher :
* * *
YouTube Videos (Search): Dr. Harekrishna Meher :
* * * 
VIDEOS of Dr.Harekrishna  Meher : 
Link : 
* * * 
Dr. Harekrishna Meher on Radio and Doordarshan Channels:
Link : 
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Saturday, February 8, 2020

Piyu Bole Piya Bole, Kya Ye Bole: Sanskrit Version (Lyrics: कान्तो ब्रूते, प्रियो ब्रूते, किं ब्रूतेऽयम्): Dr.Harekrishna Meher: DDNews Vaartaavali

Original Hindi Film Song :
पियू बोले, पिया बोले, क्या ये बोले, जानूँ ना * 
‘Piyu Bole Piya Bole, Kya Ye Bole Jaanu Naa’ *  
Film ‘Parineeta’ (2005) 
*
Sanskrit Translation by :  Dr. Harekrishna Meher
(As per Original Hindi Tune)
Sanskrit Version Lyrics :
*कान्तो ब्रूते, प्रियो ब्रूते, किं ब्रूतेऽयं, नो जाने *     
‘Kaanto Brute Priyo Brute, Kim Bruteyam No Jaane’ 
* 
Sanskrit Singers : 
Ankit Sinha (Jharkhand) and Yashashri Joshi (Maharashtra)  
*
Winner in Sanskrit Lyric Translation Competition
Conducted by Sanskrit Vaartaavali, DD News Channel, Delhi.
Program Telecast on 8 February 2020, Saturday at 7.30 pm.
Retelecast on 9 February 2020, Sunday at 12.30 pm.   
*
Courtesy : DD NEWS Channel, Sanskrit Vaartavali, Delhi.
Sanskrit Vaartavali: Full Episode (8-2-2020)
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‘Piyu Bole Piya Bole Kya Ye Bole Jaanun Naa’: Sanskrit Version :
HKMeher Blog-Link :
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हिन्दीगीत : पियू बोले, पिया बोले * (चलचित्रम् : परिणीता)
मूलस्वरानुकूल-संस्कृतानुवादकः -  डॉ. हरेकृष्ण-मेहेरः
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(स्त्री)
कान्तो ब्रूते, प्रियो ब्रूते, किं ब्रूतेऽयं, नो जाने ।  
चेतो लोलं, मन्दं मन्दं, किमिव लोलं, नो जाने ॥ (०)
*
(पु) हृदयस्य यद् वृत्तम्, वृत्तं यद् हृदयस्य  
(स्त्री) हृदये वै कान्त ! स्थाप्यम् । 
(पु) अधरं नोन्मुञ्चेऽहम्, नोन्मुञ्चे ह्यधरं तु 
(स्त्री) नेत्राभ्यां व्यक्तं सर्वम् ।   
(स्त्री) कान्तो ब्रूते, प्रियो ब्रूते, किं ब्रूतेऽयं, नो जाने । 
     चेतो लोलं, मन्दं मन्दं, किमिव लोलं, नो जाने ॥
(पु)  कान्तो ब्रूते, प्रियो ब्रूते, किं ब्रूतेऽसौ, नो जाने । 
      चेतो लोलं, मन्दं मन्दं, किमिव लोलं, नो जाने ॥ (०) 
*
(स्त्री)
तटिनीमेकामहमपृच्छम्, सविलासं कुत्रैषि त्वम् ।
त्वत्-प्रियस्य वेश्म दूरम्, वृतदोलं कुत्रैषि त्वम् ।  
किञ्चिद् भीता जाता, किञ्चिल्लज्जायुक्ता, 
इतस्ततः सोच्छला । 
सिन्धुं सम्मिलितुं हि स्वप्नस्तस्या आसीत् 
प्रिय हे ! ममैव यथा ॥  
(स्त्री) चेतो लोलं, मन्दं मन्दं, किमिव लोलं, नो जाने ।    
       कान्तो ब्रूते, प्रियो ब्रूते, किं ब्रूतेऽयं, नो जाने ॥ 
(पु)  चेतो लोलं, मन्दं मन्दं, किमिव लोलं, नो जाने ॥ (१)  
*
(पु) 
पृष्टवानहं घनालीम्, साटोपं कुत्रैषि त्वम् ।
भूमिरस्ति तर्ष-शुष्का, वर्ष त्वं, पीड़य न त्वम् ।
किञ्चिदन्तर्नादा, किञ्चित् सा कम्पिता,
इतस्ततोऽगर्जत् सा ।
प्रेमोल्लासै-र्जाता  झम्-झम्-झम्-वर्षन्ती
कान्ते ! सा त्वत्सन्निभा ॥
(स्त्री) कान्तो ब्रूते, प्रियो ब्रूते, किं ब्रूतेऽयं, नो जाने । 
       चेतो लोलं, मन्दं मन्दं, किमिव लोलं, नो जाने ॥  
(पु-स्त्री) कान्तो ब्रूते, प्रियो ब्रूते, किं ब्रूतेऽसौ, नो जाने ।  
          चेतो लोलं, मन्दं मन्दं, किमिव लोलं, नो जाने ॥ (२)
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Twitter: Link:
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हिन्दीगीत : पियू बोले, पिया बोले *  
चलचित्र : परिणीता (२००५) * 
गीतकार : स्वानंद किरकिरे *
सङ्गीतकार : शांतनु मोइत्र *  
गायक-गायिका : सोनू निगम, श्रेया घोषाल 
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 (स्त्री)
पियू बोले, पिया बोले, क्या ये बोले, जानूँ ना ।
जिया डोले, हौले हौले, क्यूँ ये डोले जानूँ ना ॥ (०)
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(पु) दिल की जो बातें हैं, बातें जो दिल की हैं
(स्त्री) दिल ही में रखना पिया ।
(पु) लब तो ना खोलूँ मैं, खोलूँ ना लब तो पर
(स्त्री) आँखों से सब कह दिया ।
(स्त्री) पियू बोले, पिया बोले, क्या ये बोले, जानूँ ना ।
       जिया डोले, हौले हौले, क्यूँ ये डोले जानूँ ना ॥
(पु)  पियू बोले, पिया बोले, क्या ये बोले, जानूँ ना ।
      जिया डोले, हौले हौले, क्यूँ ये डोले जानूँ ना ॥ (०)
*
(स्त्री)
इक नदी से मैंने पूछा, इठलाके चल दी कहाँ ।
दूर तेरे पी का घर है, बल खाके चल दी कहाँ ।
थोड़ा वो घबराई, थोड़ा-सा शरमाई
उछली यहाँ से वहाँ ।
सागर से मिलने का, उसका जो सपना था
मेरी ही तरह पिया 
(स्त्री) जिया डोले, हौले हौले, क्यूँ ये डोले जानूँ ना ।
    पियू बोले, पिया बोले, क्या ये बोले, जानूँ ना ।
(पु)  जिया डोले, हौले हौले, क्यूँ ये डोले जानूँ ना ॥ (१)
*
(पु) 
मैंने पूछा इक घटा से, इतराके चल दी कहाँ ।
प्यास की भरी ज़मीं है, बरसो भी तरसाओ ना ।
थोड़ा वो गुर्राई, थोड़ा-सा थर्राई
गरजी यहाँ फिर वहाँ ।
प्रीत लुटाती फिर, झम-झम-झम बरसी वो
तेरी ही तरह पिया ॥
(स्त्री) पियू बोले, पिया बोले, क्या ये बोले, जानूँ ना ।
       जिया डोले, हौले हौले, क्यूँ ये डोले जानूँ ना ॥
(पु-स्त्री) पियू बोले, पिया बोले, क्या ये बोले, जानूँ ना ।
          जिया डोले, हौले हौले, क्यूँ ये डोले जानूँ ना ॥ (२)
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Related Links :
‘Chalachitra-Gita-Sanskritaayanam’: चलचित्र-गीत-संस्कृतायनम्  :
* * *
Biodata: Dr. Harekrishna Meher :
* * *
YouTube Videos (Search): Dr. Harekrishna Meher :
* * * 
VIDEOS of Dr.Harekrishna  Meher : 
Link : 
* * * 
Dr. Harekrishna Meher on Radio and Doordarshan Channels:
Link : 
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Saturday, February 1, 2020

Odia Translations of Sanskrit Kavyas by Dr. Harekrishna Meher: Published in BARTIKA Magazine

Some Sanskrit Kavyas rendered into Odia Metrical Translations

PUBLISHED in 'BARTIKA' (Famous Literary Quarterly) 
Dasahara Special Issues, Dasharathapur, Jajpur, Orissa ::
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* Niti-Sataka of Bharttrihari (Complete), 1995-1997.  
* Sringara-Sataka of Bharttrihari (Complete),1998.  
* Vairagya-Sataka of Bharttrihari (Complete), 1999. 
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Bhartrihari-Sataka-Traya : Link: 
http://hkmeher.blogspot.com/2014/03/bhartrihari-sataka-traya-niti-sringara.html

Naishadhacharita (Navama Sarga) of Sriharsha, 2000.  

Raghuvamsha (II Sarga) of Kalidasa, 2002. 

Kumara-Sambhava (V Sarga) of Kalidasa, 2001. 
http://hkmeher.blogspot.com/2016/10/kumara-sambhava-kavya-canto-v-odia.html

Kumara-Sambhava (VII Sarga) of Kalidasa, 2004. 
http://hkmeher.blogspot.com/2016/10/kumara-sambhava-kavya-canto-vii-odia.html
*
Kumara-Sambhava (II Sarga) of Kalidasa, 2006. 
Kumara-Sambhava (VIII Sarga) of Kalidasa, 2009 :

Ritu-Samhara of Kalidasa (Complete), 2015 : 

Gita-Govinda of Poet Jayadeva (Complete), 2016 : 
*
Meghaduta of Poet Kalidasa (Complete), 2017 : 
*
Raghuvamsha (6th and 7th Sargas) of Kalidasa, 2018 : 
*
Kumara-Sambhava (3rd and 4th Sargas) of Kalidasa, 2019 : 
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Koshali Meghaduta (Complete Koshali Lyrical Translation of Meghaduta), 2003 : 
(Later on Published in Book-Form in 2010 and Awarded with 
Dr. Nilamadhaba Panigrahi Samman-2010 by Sambalpur University):
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Kumara-Sambhava: Odia Version :
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Raghuvamsha: Odia Version :
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Translated Works by Dr. Harekrishna Meher : 
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Biodata :
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Literary Awards and Felicitations to Dr. Harekrishna Meher:
http://hkmeher.blogspot.com/2018/09/literary-awards-and-felicitations-to-dr.html
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Literary Works of Dr. Harekrishna Meher :  
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Interview with Dr.Harekrishna Meher: Published in Bartika Magazine: Hindi Version: http://hkmeher.blogspot.com/2017/11/interview-with-dr-harekrishna-meher-by.html
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