Friday, December 20, 2013

देवि दुर्गे ! नमस्ते (Devi Durge Namaste) Sanskrit Poem/ Dr.Harekrishna Meher

Devi Durge Namaste (Sanskrit Poem) 
By : Dr. Harekrishna Meher

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देवि दुर्गे ! नमस्ते (संस्कृत-कविता)
रचयिता : डॉ. हरेकृष्ण- मेहेरः
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 माङ्गल्यानां  त्वमसि जननी  देवि दुर्गे ! नमस्ते
दौर्बल्यानां  सबल-हरणी  भक्ति-माल्यै-र्वरेण्या ।
त्वं शल्यानां  समुपशमनी  शैलजा शूलहस्ते !
वात्सल्यानां  मधुर-झरणा  देहि भद्रं शरण्या ॥  (१)
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त्वं गायत्री  निखिल-जगतामन्नपूर्णा प्रसन्ना
मेधा विद्या  त्वमसि शुभदा  शाम्भवी शक्तिराद्या ।
मर्त्त्ये लोके  सकल-कलुषं  नाशय स्वीय-धाम्ना
सिंहासीना  कुरु सुकरुणां  शङ्करी विश्ववन्द्या ॥  (२)
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संसारश्री-र्जनय सुखदां  भावनां सुप्रकाशां
शं शर्वाणी  वितर तमसां  ध्वंसिनी पावनी त्वम् ।
पापाचारैः  प्रबल-मथितां  दुष्टदैत्यै-र्निराशां 
पृथ्वीमार्त्तां  व्यथित-हृदयां  त्राहि कात्यायनी त्वम् ॥  (३)
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रुद्राणी त्वं  वितर सुभगं  मातृका सन्मतीनां 
शान्ति-र्धर्मः  प्रसरतु जने  त्वत्प्रसादैः शिवानि !
घोरा काली  भव कलियुगे  घातिनी दुर्गतीनां
त्वं भक्तानामभय-वरदा  भीममूर्त्ति-र्भवानि ! ॥ (४)
*
वन्दे मातस्तव सुविमलं  पाद-राजत्-सरोजं 
दुर्गे दुःखं  हर दशभुजा  देहि सानन्दमोजम् । 
त्वं पद्मास्या  हसित-मधुरं  सौरभं तन्वती स्वं
मोहस्तोमं  हर सुमनसां  पूजिता पाहि विश्वम्  ॥ (५)

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(This Poem as ‘Avahani’ has been published in ‘Bartika’ ,
 Literary Quarterly,  Dashahara Special Issue, October-December 2013, 
Dasarathapur, Jajpur, Odisha.)
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