Saturday, May 8, 2021

Kahaan Tak Ye Man Ko: Sanskrit Version (Lyrics क्व यावद् वञ्चिताsसौ): Dr.Harekrishna Meher: DDNews Vaartavali

Original Hindi Song :
Kahaan Tak Ye Man Ko Andhere Chhalenge *
कहां तक ये मन को अंधेरे छलेंगे * (Film ‘Baaton Baaton Mein’ 1979) 
*

Sanskrit Translation by : Dr. Harekrishna Meher 
(As per Original Hindi Tune) 
Sanskrit Version Lyrics : क्व यावद् वञ्चिताsसौ तमोवारश्चित्तम् *
‘Kva Yaavad Vanchitaasau Tamovaarashchittam’.
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Winner in Sanskrit Lyric Translation Competition
Conducted by Sanskrit Vaartaavali, DDNEWS Channel, Delhi.
Song Program Telecast on 8 May 2021, Saturday at 6 pm.
Sanskrit Singer: Ankit Sinha (Jharkhand) 
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Courtesy and Gratitude to: 
DDNEWS, Sanskrit Vaartavali: Full Episode (8-9 May 2021):
DDNEWS Live: Link: 
https://www.facebook.com/DDNews/videos/520415695657057 

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Separate Song Video: HKMeher YouTube Channel: 

Link: https://youtu.be/auE5GVESzEo

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मूल-हिन्दीगीतम् : कहां तक ये मन को अंधेरे छलेंगे * 
चलचित्रम् : बातों बातों में (१९७९) * 
मूलस्वरानुकूल-संस्कृतानुवादकः - डॉ. हरेकृष्ण-मेहेरः

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क्व यावद् वञ्चिताsसौ तमोवारश्चित्तम् ।
विषण्णा दिनाली कदा वै गन्ताsस्तम् ।। (०)
*
कदा सौख्यं दु:खम्, इदं जीवनं स्वम् ।
ऋतु: पत्रपात:  पल-द्विपलोsयम् ।
पथे श्वोsपि फुल्लिता, नवं सून-जातम् ।
विषण्णा दिनाली कदा वै गन्ताsस्तम् ।। (१)
*
भवेद् वायु-वेगो वा, कियत्-तीव्र: कामम्,
परं स्वान्ते स्वकीये विश्वासं भजेस्त्वम् ।
मेलिष्यन्ति पुनस्त्वां, भिन्ना येsधिमार्गम् ।
विषण्णा दिनाली कदा वै गन्ताsस्तम् ।। (२)
*
वदेत् कोsपि किञ्चिद् , इदं किन्तु सत्यम्,
क्वचित् प्रेम्ण ऊर्मी  समुत्थिता येयम् ।
तामेकद्यु-र्मेलिता, अवश्यं प्रतीरम् ।
विषण्णा दिनाली कदा वै गन्ताsस्तम् ।। (३) 
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ज्ञातव्यम् :
* वञ्चिता, वञ्चयिता (तृच्)= वञ्चक: ।
* तमोवार: (वार: = समूह:) = अन्धकारा:  ।
* दिनाली = दिन-समूह: (आली, आलि: = समूह:) । गन्ता = गमिष्यति (लुट्)।

* एकद्यु: = एकस्मिन् दिने । (एकेद्यु: शब्द: अपि मया पूर्वं व्यवहृत: । (आनन्द-चलचित्रस्य - ज़िन्दगी कैसी है पहेली हाय - 

'एक दिन सपनों का राही' ।।  धरम करम -चलचित्रस्य  'एक दिन बिक जायेगा'।। अन्यत्र मम मौलिक-कवितासु अपि प्रयुक्त: ।
* ऊर्मि: (पु.स्त्री), ऊर्मी (स्त्री) = तरङ्ग: ।
* फुल्लिता = फुल्लिष्यति (लुट्) ।
* मेलिता = मेलिष्यति (लुट्) ।
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मूल-हिन्दीगीत : कहां तक ये मन को *
चलचित्र : बातों बातों में (१९७९)
गीतकार : योगेश *  
संगीतकार : राजेश रोशन * 
गायक : किशोर कुमार * 
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कहां तक ये मन को अंधेरे छलेंगे,
उदासीभरे दिन  कभी तो ढलेंगे ।। (०)
*
कभी सुख कभी दुःख, यही जिन्दगी है,
ये पतझड़ का मौसम, घड़ी-दो-घड़ी है ।
नये फूल कल की डगर में खिलेंगे ।
उदासीभरे दिन  कभी तो ढलेंगे ।। (१)
*
भले तेज कितना, हवा का हो झोंका,
मगर अपने मन में, तू रख ये भरोसा ।
जो बिछड़े सफ़र में, तुझे फिर मिलेंगे ।
उदासीभरे दिन  कभी तो ढलेंगे ।। (२)
*
कहे कोई कुछ भी, मगर सच यही है,
लहर प्यार की जो, कहीं उठ रही है ।
उसे एक दिन तो किनारे मिलेंगे ।
उदासीभरे दिन  कभी तो ढलेंगे ।। (३)
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Related Link :
चलचित्र-गीत-संस्कृतायनम् :
http://hkmeher.blogspot.com/2017/05/chalachitra-gita-sanskritayanam.html?m=1
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Biodata:
http://hkmeher.blogspot.com/2012/06/brief-biodata-english-dr-harekrishna.html?m=1
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