Wednesday, November 17, 2021

Raghuvansha: Canto-3: Odia Version: Dr.Harekrishna Meher

RAGHUVAMSHA MAHAKAVYA (Canto-3rd) * 
Original Sanskrit Epic Poem by: Mahakavi Kalidasa *  
Odia Metrical Translation by: 
Dr. Harekrishna Meher 
(Taken from Complete Odia Version) 
रघुवंश महाकाव्य (तृतीय सर्ग) *  
रघुङ्क जन्म एवं राज्याभिषेक * 
(ओड़िआ बङ्गळाश्री रागरे पद्यानुवाद ) 
= = = = = = =
Canto-3rd : 
Birth and Rajyaabhisheka of King Raghu. 
(Translations done during 1975-1976)   
* * * * 
Published in BARTIKA, Famous Literary Quarterly, 
MahaDashahara Special Issue, October-December 2021,  
Pages 1039-1066. 
Saraswata Sahitya Sanskrutika Parishad, 
Dasharathapur, Jajpur, Odisha. 
* 
For examples, Two Translated Verses 
with Original Sanskrit, shown in Devanagari and Odia Scripts.
= = = = = = = 
निधान-गर्भामिव सागराम्बरां 
शमीमिवाभ्यन्तर-लीन-पावकाम् । 
नदीमिवान्त:सलिलां सरस्वतीं 
नृप: ससत्त्वां महिषीममन्यत ।। (रघु. ३/९) 
* * 
गरभधारिणी       राणीङ्कु एपरि 
         मणिले निजे राजन, 
बसुन्धरा यथा       धारण करिछि 
          अमूल्य दिव्य रतन । 
शमीलता येह्ने       गोपने बह्निकि 
          बहिथाए अभ्यन्तरे, 
सरस्वती नदी         स्वउदरे यथा 
          उदक धारण करे ।। 
(In Odia Script) 
ଗରଭଧାରିଣୀ       ରାଣୀଙ୍କୁ ଏପରି 
       ମଣିଲେ ନିଜେ ରାଜନ, 
ବସୁନ୍ଧରା ଯଥା        ଧାରଣ କରିଛି 
        ଅମୂଲ୍ୟ ଦିବ୍ୟ ରତନ । 
ଶମୀଲତା ଯେହ୍ନେ  ଗୋପନେ ବହ୍ନିକି 
        ବହିଥାଏ ଅଭ୍ୟନ୍ତରେ, 
ସରସ୍ବତୀ ନଦୀ      ସ୍ବଉଦରେ ଯଥା 
        ଉଦକ ଧାରଣ କରେ ।। 
= = = = = = = = = = = = = 

हरिर्यथैक: पुरुषोत्तम: स्मृत: 
महेश्वरस्त्र्यम्बक एव नापर: । 
तथा विदुर्मां मुनय: शतक्रतुं 
द्वितीयगामी न हि शब्द एष न:॥ (रघु. ३/४९) 
* * 
(In Devanagari Script) : 
*
येपरि बिष्णु हिं      बिश्वे परिचित 
         पुरुषोत्तम नामरे, 
महेश्वर बोलि    शिब एका ख्यात 
         अन्य के होइ न पारे । 
सेपरि मोते हिं      शतक्रतु बोलि 
        मुनिगण थान्ति कहि, 
मो ब्यतीत अन्य  काहारिकु बोध 
        न कराए नाम एहि ॥ 
*
(In Odia Script) 
ଯେପରି ବିଷ୍ଣୁ ହିଁ      ବିଶ୍ବେ ପରିଚିତ 
         ପୁରୁଷୋତ୍ତମ ନାମରେ, 
ମହେଶ୍ବର ବୋଲି  ଶିବ ଏକା ଖ୍ୟାତ 
      ଅନ୍ୟ କେ ହୋଇ ନ ପାରେ । 
ସେପରି ମୋତେ ହିଁ   ଶତକ୍ରତୁ ବୋଲି 
           ମୁନିଗଣ ଥାନ୍ତି କହି, 
ମୋ ବ୍ୟତୀତ ଅନ୍ୟ  କାହାରିକୁ ବୋଧ 
        ନ କରାଏ ନାମ ଏହି ।। 
= = = = = = = = = = = = 
    
Related Links 
= = = = = = = = 
Odia Version of Raghuvamsha: 
* * * 
Raghuvamsha: Canto-3: Odia Version: Blog Link : 
Facebook Link : 
Some Scanned Pages of the Published Odia Version (Canto-3rd) 
of Raghuvamsha Mahakavya from 'Bartika' Magazine are posted here. 
======= 


No comments: